विधानसभा अध्यक्ष कि अध्यक्षता में पूरे राज्य में हर घर नल-जल योजना के रख-रखाव और संचालन की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई
DHIRAJ.
मरम्मति एवं सम्पोषण की एक प्रक्रिया बनाये रखने का निर्णय लिया गया है
गया जी।बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ० प्रेम कुमार ने अपने कार्यालय कक्ष में मिथिलेश तिवारी एवं अन्य सदस्यों से प्राप्त हर–घर–नल–जल योजना से संबंधित ध्यानाकर्षण सूचना पर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री एवं वरीय पदाधिकारीगण तथा पंचायती राज विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की है।
इस बैठक में पूरे राज्य में हर घर नल-जल योजना के रख-रखाव और संचालन की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई है ।मिथिलेश तिवारी एवं अन्य सदस्यों के ध्यानाकर्षण सूचना में यह बात उठाई गई थी कि सम्पूर्ण राज्य में वार्ड सदस्य द्वारा कराये गये हर घर नल-जल योजना की स्थिति अत्यंत ही खराब है। अधिकांश पाइप फट चुके हैं, नल टूटे हुए हैं, विद्युत विपत्र के भुगतान के अभाव में अधिकांश बंद पड़े हैं, बोरिंग और पानी टंकी के भूमि विवाद और नल जल अनुरक्षक के मानदेय भुगतान के अभाव में यह योजना दम तोड़ रही है।
विभागीय अधिकारियों द्वारा बताया गया कि सात निश्चय योजना अन्तर्गत बिहार राज्य के सभी परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गयी थी। इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में हर घर नल का जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य नगर विकास एवं आवास विभाग को तथा ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल का जल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग एवं पंचायती राज्य विभाग को दी गयी थी। इस निर्णय के आलोक में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा राज्य के 56,447 वार्डों में 50,081 योजना एवं पंचायती राज विभाग द्वारा 58.003 ग्रामीण वार्डों में 70,157 योजनाओं का निर्माण कार्य कराया गया है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा निविदा के माध्यम से चयनित संवेदकों द्वारा निर्माण कार्य एवं पाँच साल का रख-रखाव कार्य कराया जा रहा है। पंचायती राज विभाग द्वारा योजनाओं का निर्माण कार्य वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति (WIMC) के द्वारा कराया गया एवं इसी समिति के द्वारा योजनाओं का संचालन एवं रख-रखाव का कार्य किया जा रहा था। योजनाओं के बेहतर प्रबंधन, सतत् संचालन एवं क्रियान्वयन की प्रक्रिया में एकरूपता लाने के उद्देश्य से राज्य के सम्पूर्ण ग्रामीण क्षेत्र में जलापूर्ति योजनाओं के संचालन, मरम्मति एवं सम्पोषण की एक प्रक्रिया बनाये रखने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय के आलोक में पंचायती राज विभाग द्वारा वर्ष 2023 में पंचायती राज विभाग के नियंत्रणाधीन ग्रामीण वाडों में क्रियाचित जलापूर्ति योजनाओं के सतत् संचालन एवं रख-रखाव हेतु लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को हस्तांतरित किया गया है। पंचायती राज विभाग से निर्मित 70,157 योजनाओं में से हस्तांतरण के समय 23,302 अदद् बन्द, 31,879 अदद् आंशिक चालू एवं 14,976 अदद योजनाएँ चालू थी। पंचायती राज विभाग से हस्तांतरित योजनाओं के अवययों का सुदृढीकरण किया गया है और आगे भी किया जा रहा है। जिसमें योजनाओं की साधारण मरम्मति के साथ-साथ वृहत मरम्मति यथा वितरण प्रणाली का पुनः स्थापन का कार्य, नया बोरिंग का निर्माण, नये मोटर का अधिष्ठापन, नये टंकी का अधिष्ठापन, नये स्टेजिंग का निर्माण, स्टेजिंग का रंग-रोगन का कार्य इत्यादि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा निविदा के माध्यम से चयनित संवेदकों के द्वारा कराया जा रहा है।
प्रति योजना प्रति वर्ष संचालन, मरम्मति एवं सम्पोषण हेतु रूपये 1,08,372/- एक लाख आठ हजार तीन सौ बहत्तर रूपये स्वीकृत है। जिसमें से पंचायती राज विभाग के माध्यम से पम्प चालक के मानदेय एवं विद्युत विपत्र भुगतान हेतु रूपये 54,000/-चौवन हजार रूपये मात्र तथा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के माध्यम से योजनाओं के मरम्मति एवं रख-रखाव हेतु रूपये 54,372/- चौवन हजार तीन सौ बहत्तर रुपए मात्र की स्वीकृति दी गयी है।
इस बैठक में यह बात सामने आई कि पंचायती राज विभाग द्वारा हस्तांतरित कई योजनाओं में निर्माण संबंधी खामियां हैं। इन खामियों को दुरुस्त करने के साथ–साथ मरम्मति एवं रख-रखाव हेतु स्वीकृत 54,372/- (चौवन हजार तीन सौ बहत्तर रुपए) मात्र की राशि का प्रावधान किया गया है, जो अपर्याप्त है। इस संबंध में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री वित्त विभाग के मंत्री के साथ बैठक करेंगे।…
