नेहरू जी का समाजवाद केवल आर्थिक सिद्धांत नहीं जीवन दर्शन भी है-डॉ. विवेकानंद मिश्रा

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विश्वनाथ आनंद .
गयाजी,( बिहार)-पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की जयंती एवं बाल दिवस के अवसर पर भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के तत्वावधान में एक आभासीय विचार संगोष्ठी का आयोजन डॉक्टर विवेकानंद पथ, गोल बगीचा में किया गया। इस अवसर पर नगर के अनेक विद्वान, अध्यापक, समाजसेवी, छात्रगण एवं गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार प्रकट की है। कार्य-क्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध समाजसेवी आचार्य पंडित सच्चिदानंद मिश्रा(न इकी) उन्होंने कहा की बालक ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना है, उनके भीतर जो निष्कलुषता एवं सत्य का भाव है वही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। वर्तमान युग में बालक को का चित अनेक प्रलोभनों से विचलित हो रहा है। अतः अभिभावक एवं शिक्षक वर्ग का कर्तव्य है कि वह उन्हें धर्म नीति और संस्कार की जड़ों से जोड़ रखें।आचार्य मिश्रा ने कहा कि यदि शिक्षा केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने का साधन बन कर रह जाए तो समाज का पतन निश्चित है, शिक्षा का लक्ष्य सदाचार और राष्ट्र सेवा होना चाहिए।
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में भाग ले रहे सम्मानित साहित्यकार आचार्य राधा मोहन मिश्रा माधव ने कहा कि आज का युग यंत्रों और सुविधाओं का योग बन गया है परंतु नैतिकता और संवेदनशीलता की कमी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। यदि बालक संस्कारहीन हो गए तो समाज का भविष्य अंधकार में हो जाएगा।
ज्योतिष शिक्षा एवं शोध संस्थान के निदेशक डॉ ज्ञानेश भारद्वाज ने कहा की पंडित जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से प्रत्येक शिक्षक एवं अभिभावक को प्रेरणा लेनी चाहिए, की किस प्रकार बालकों के हृदय में स्नेह और प्रोत्साहन का बीज बोया जाता है।

इसके अलावा जिन व्यक्तियों ने अपने विचार प्रकट की है उनमें संरक्षक चरण बाबू डालमिया, डॉक्टर दिनेश कुमार सिंह, डॉक्टर रविंद्र कुमार, रूबी कुमारी, बबलू बाबा रानी मिश्रा, आचार्य सुनील कुमार पाठक, अमरनाथ पांडे, अक्ष्य कुमार बिठ्ल, शंभू गिरी, राजीव नयन पांडेय, रंजीत पाठक, पवन मिश्रा, नीरज वर्मा, प्रोफेसर सुनील कुमार मिश्रा, डॉक्टर छोटे बाबू, महेश मिश्रा, डॉक्टर मंटू मिश्रा, शोभा देवी, अशोक कुमार गुप्ता देवेंद्र नाथ मिश्रा, किरण पाठक, नेहा कुमारी, रंजू देवी, मृदुल मिश्रा, फूल कुमारी, मोहम्मद मुजीब अंसारी, महेंद्र दास निरंकारी, नरेश कुमार, अधिवक्ता राशिड मसूद, रजनी कुमार, डॉ मनाली, रश्मि रंजीनी पांडे, मनीष कुमार, डिंपल कुमारी, ज्योति कुमार, तरन्नुम तारा तस्लीम नुसरत, आयशा परवीन इशरत जमील, अधिवक्ता दीपक पाठक, विश्वजीत चक्रवर्ती, ऋषिकेश गुर्दा, शंभू गुर्दा यादि उल्लेखनीय थे।
सभा की अध्यक्षता करते हुए डॉ. विवेकानंद मिश्र जी ने अपने सारगर्भित विचारों में कहा कि भारत की आत्मा उसके बालकों में निवास करती है। आज के बालक ही कल के राष्ट्रनिर्माता हैं। उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू यह मानते थे की जातिगत पूर्वाग्रह, कट्टर धर्मान्धता, तथा सामाजिक विषमता में व्यवहार, बुद्धिमता एवं संतुलित विचारों के द्वारा ही सामाजिक जीवन के वीभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तन लाया जा सकता है। उनका संपूर्ण जीवन बाल स्नेह, उदारता और राष्ट्रप्रेम का
डॉक्टर मिश्र ने यह भी कहा कि नेहरू जी का समाजवाद केवल आर्थिक सिध्दांत नहीं, जीवन दर्शन भी है।धन्यवाद ज्ञापन विष्णु पद मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव गजाधर लाल पाठक ने किया उन्होंने कहा पंडित जी केवल एक राजनेता नहीं, अपितु मानवता के उपासक थे, जिनका हृदय सदैव बालकों के प्रति ममता करुणा से भरा था।