शब्दवीणा झारखंड प्रदेश समिति द्वारा देवघर में विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन

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-देवघर के अटल लैंग्वेज लैब में गूंज उठी शब्दवीणा.
-राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई देगी शब्दवीणा की गूंज: प्रो. रामनंदन सिंह.
विश्वनाथ आनंद
गया जी/देवघर( बिहार/ झारखंड)-राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ की झारखंड प्रदेश समिति एवं देवघर जिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में अटल लैंग्वेज लैब में झारखंड प्रदेश संरक्षक प्रो. (डॉ.) रामनंदन सिंह की अध्यक्षता में विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। नंदन रामपुरी द्वारा विनय-पत्रिका के प्रथम पद्य से उद्धृत ‘गाइए गणपति जगवंदन’ मंगलाचरण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। शब्दवीणा के झारखंड प्रदेश संरक्षक प्रो. रामनंदन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष डॉ विजय शंकर, देवघर जिला अध्यक्ष सोनाली भारती, जिला संगठन मंत्री श्रवण सहस्रांशु सहित गणमान्य अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र एवं पुष्पमाला प्रदान करके किया गया। प्रो रामनंदन सिंह एवं डॉ विजय शंकर ने शब्दवीणा की संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रश्मि प्रियदर्शनी को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि आने वाले समय में शब्दवीणा की गूंज राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई देगी।विचारगोष्ठी में उपस्थित शब्दवीणा साधकों ने हिंदी साहित्य की सेवार्थ साथ मिलकर कार्य करते रहने की बात कही। प्रो रामनंदन सिंह ने साहित्य के “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” से प्रेरित उद्देश्यों को ध्यान में रखकर साहित्य सेवा करने की बात कही। डॉ विजय शंकर ने समिति की ओर से मासिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए झारखंड में शब्दवीणा की गठित गोड्डा, देवघर, जमशेदपुर, राँची, पाकुड़ आदि जिला समितियों के बाद अन्य जिलों में भी शब्दवीणा की जिला इकाइयाँ गठित की जाने पर सहमति प्रकट की।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में उपस्थित कवि-कवयित्रियों ने गीत, गज़ल, दोहे और मुक्तकों की मनोरम और प्रेरणादायी प्रस्तुति से वातावरण को गुंजित कर डाला। रचना झा की बिंबात्मक पंक्ति ‘अंधेरे में रहने को अभ्यस्त हुए लोग, उजाले से डरने लगते हैं’, सोनम झा की “मैं” एवं “स्व” पर रचित काव्य अभिव्यक्ति सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। मानवीय संवेदना के ऊपर प्रीति कुमारी की रचना ‘संसार’, सागर मिश्रा की “जो अधूरे मन से साथ दे, उसे पूरे मन से छोड़ दो’ पर खूब तालियाँ बजीं। पुनीत दुबे की रचना ने समाज के गहरे रिश्तों पर प्रकाश डाला, तो बबन बदिया ने अपनी रचना में मानव से मानव के बीच की बढ़ती दूरी पर चिंता जताई। शब्दवीणा देवघर जिला सचिव डॉ. परशुराम तिवारी ने अपनी गजल “बिन बुलाए ही दिल में पनाह लीजिए। बेवक्त, बेवजह अब सता लीजिए” सुनाया। श्री ठाकुर ने समाज में घटते मानवीय मूल्यों पर रचना प्रस्तुत की। सरिता भारती की रचना को भी खूब सराहना मिली। सोनाली भारती ने शब्दवीणा को और आगे ले जाने के संकल्प को दोहराते हुए संस्था को वीणा की भाँति जीवंत बनाए रखने की अभिलाषा व्यक्त की। वहीं श्रवण कुमार ने कविता के माध्यम से “जीवन दर्शन” प्रस्तुत किया। शब्दवीणा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेश विद्यार्थी ने बतलाया कि कार्यक्रम अध्यक्ष एवं झारखंड प्रदेश संरक्षक वरिष्ठ पत्रकार प्रो. रामानंदन सिंह ने सफल कार्यक्रम के लिए डॉ विजय शंकर सहित शब्दवीणा झारखंड प्रदेश समिति को हार्दिक बधाई दी। इस अवसर पर देवघर जिला कार्यकारिणी के सभी सदस्य सहित अटल लैंग्वेज लैब की संस्थापक सदस्या श्रीमती मधुलिका शंकर, वेदान्त सत्यम् एवं विद्यार्थी माही ठाकुर उपस्थित रहे।