उत्तराखंड की आवाज बने प्रीतम सिंह — धामी सरकार के खिलाफ 16 फरवरी को निर्णायक महारैली का ऐलान

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डॉ. पंकज कौशिक .
“देहरादून चलो — सरकार भ्रष्ट, जनता त्रस्त, अधिकारी मस्त!”
“कांग्रेस को लाना, भाजपा को भगाना — प्रीतम की महारैली का यही उद्घोष!”
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश चुनाव समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह मजबूत, मुखर और आक्रामक तेवरों के साथ केंद्र में आ गए हैं। 16 फरवरी को प्रस्तावित विशाल महारैली के माध्यम से उन्होंने धामी सरकार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का शंखनाद कर दिया है।
प्रीतम सिंह ने प्रदेश की मौजूदा स्थिति को “चिंताजनक और जनविरोधी” बताते हुए कहा कि उत्तराखंड आज अराजकता, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और ध्वस्त कानून-व्यवस्था के संकट से गुजर रहा है। देवभूमि की गरिमा आहत है और आम नागरिक भय के साये में जीवन जीने को विवश है।

अंकिता को न्याय: संघर्ष का संकल्प
चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक बेटी के साथ अन्याय नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की आत्मा पर आघात था।
“जब तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिलता, कांग्रेस सड़कों से सदन तक संघर्ष करती रहेगी,” उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के प्रभाव में निष्पक्षता प्रभावित हुई है, जिससे जनता का विश्वास डगमगाया है।
जनआक्रोश की बुलंद आवाज: प्रीतम सिंह
प्रीतम सिंह ने कहा कि प्रदेश में “पुलिसिया शासन” का वातावरण है, जहां जनसमस्याओं के समाधान के बजाय आवाज उठाने वालों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
उन्होंने राज्य की जमीनी हकीकत को रेखांकित करते हुए कहा—
गांवों की व्यवस्थाएं चरमरा चुकी हैं।
किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
व्यापारी वर्ग महंगाई और कर नीतियों से त्रस्त है।
स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं, विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में।
बेरोजगारी: युवाओं का टूटा विश्वास
उन्होंने बेरोजगारी को राज्य का सबसे बड़ा अभिशाप बताया। भर्ती घोटालों और चयन प्रक्रियाओं में अनियमितताओं ने युवाओं के सपनों को चकनाचूर कर दिया है।
“उत्तराखंड का युवा आज निराश है। रोजगार मांगने पर लाठियां और मुकदमे मिल रहे हैं,” उन्होंने तीखे शब्दों में कहा।
उनके अनुसार, यह महारैली युवाओं, किसानों, महिलाओं, व्यापारियों और आम नागरिकों की सामूहिक आवाज बनेगी।
16 फरवरी: जनशक्ति का प्रदर्शन
कांग्रेस पार्टी प्रदेश की ज्वलंत समस्याओं—
बेरोजगारी
बढ़ते घोटाले
महिलाओं की सुरक्षा
महंगाई और भ्रष्टाचार
ध्वस्त कानून व्यवस्था
किसान विरोधी नीतियां
“मनरेगा बचाओ संघर्ष”
व्यापारी एवं मध्यमवर्ग की पीड़ा
—को लेकर 16 फरवरी को एक विशाल महारैली आयोजित करेगी।
इस महारैली में प्रदेशभर से हजारों लोग देहरादून पहुंचकर राजभवन का घेराव करेंगे और सरकार को जनता की ताकत का एहसास कराएंगे।
प्रीतम सिंह ने इसे “व्यवस्था परिवर्तन की शुरुआत” बताया और कहा कि यह केवल राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि जनभावनाओं का विस्फोट होगा।
2027 का स्पष्ट संदेश
प्रीतम सिंह ने विश्वास जताया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी।
“यह केवल कांग्रेस का दावा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनता का आक्रोश है जो 16 फरवरी को सड़कों पर दिखाई देगा,” उन्होंने कहा।

प्रदेश की राजनीति में यह महारैली एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।
प्रीतम सिंह स्वयं को केवल विपक्ष के नेता के रूप में नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनभावनाओं की सशक्त आवाज और जनसंघर्ष के अग्रदूत के रूप में स्थापित करते दिखाई दे रहे हैं।
16 फरवरी को देहरादून की धरती पर यह तय होगा कि उत्तराखंड की जनता बदलाव के लिए कितनी तैयार है।