देवघर में महिला विकास मंच का 11वां वार्षिक महोत्सव भव्यता एवं गरिमा के साथ संपन्न
DHIRAJ.
महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता एवं जनजागरूकता के संकल्प के साथ दो दिवसीय आयोजन
समाज में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना समय की आवश्यकता है।- उतर प्रदेश अध्यक्ष
गया जी।भगवान भोलेनाथ की पावन नगरी देवघर में महिला विकास मंच का 11वां वार्षिक महोत्सव अत्यंत भव्य, अनुकरणीय एवं प्रेरणास्पद वातावरण में संपन्न हुआ है। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों एवं आमजन की उल्लेखनीय उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया है।इस आयोजन की सफलता में स्थानीय प्रशासन, समाज के विभिन्न वर्गों तथा आम नागरिकों के सक्रिय एवं समर्पित सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसके लिए मंच की ओर से सभी के प्रति हृदय से आभार प्रकट किया गया है।
इस कार्यक्रम का शुभारंभ अत्यंत विधिवत एवं आध्यात्मिक वातावरण में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया है। इसके उपरांत गायत्री मंत्र के सामूहिक उच्चारण ने पूरे परिसर को भक्तिमय एवं ऊर्जावान बना दिया है। इसके साथ ही “कर्पूर गौरं करुणावतारम्” की मंगल ध्वनि ने आयोजन को दिव्यता प्रदान की, जिससे उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो उठा।मंचासीन अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ शॉल, शंखनाथ माला एवं सम्मान-चिन भेंट कर भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में समाज कल्याण विभाग से जुड़े रंजन की गरिमामयी उपस्थिति रही है। इसके अतिरिक्त कई सरकारी पदाधिकारी भी मौके पर उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए अत्यंत उपयोगी पहल बताया है।
इस अवसर पर महिला विकास मंच के चेयरमैन पी.के. चौधरी ने अपने विस्तृत एवं प्रभावशाली संबोधन में कहा कि महिला विकास मंच की स्थापना केवल एक संगठन के रूप में नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त अन्याय, असमानता एवं उत्पीड़न के विरुद्ध एक व्यापक सामाजिक आंदोलन के रूप में की गई थी। उन्होंने कहा कि वर्षों पूर्व जो बीज बोया गया था, वह आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप धारण कर चुका है, जिसकी शाखाएं देश के कोने-कोने तक फैल चुकी हैं।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि महिला विकास मंच आज केवल महिला उत्पीड़न के मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष उत्पीड़न, पारिवारिक विवाद, सामाजिक विसंगतियों एवं मानवाधिकार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी गंभीरतापूर्वक कार्य कर रहा है।
पी.के. चौधरी ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि समाज में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो तथा समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता के साथ कार्य करे। उन्होंने संगठन के कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उनकी अथक मेहनत, निष्ठा एवं समर्पण के कारण ही आज महिला विकास मंच राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है।
वहीं महिला विकास मंच की राष्ट्रीय संरक्षक एवं अध्यक्ष वीणा मानवी ने अपने विस्तृत एवं प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक सतत सामाजिक क्रांति है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान एवं सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक विकास की परिकल्पना अधूरी ही रहेगी।
वीणा मानवी ने अपने वक्तव्य में संगठन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मंच ने अब तक हजारों पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने एवं समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे मामले सामने आए, जहां महिलाएं पूरी तरह निराश हो चुकी थीं, लेकिन महिला विकास मंच के सहयोग से उन्होंने न केवल न्याय प्राप्त किया, बल्कि अपने जीवन को एक नई दिशा देने में भी सफल रहीं हैं।
उन्होंने आगे कहा कि संगठन का प्रत्येक कार्यकर्ता समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए सेवा, समर्पण एवं संघर्ष की भावना के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आने वाले समय में महिला विकास मंच शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं कानूनी सहायता के क्षेत्र में और अधिक व्यापक एवं प्रभावी पहल करेगा, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग तक इसका लाभ पहुंच सके।
