बाल विवाह और एसिड अटैक जैसे अपराध न केवल कानूनन दंडनीय हैं,– राजेंद्र प्रसाद अधिवक्ता

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DHIRAJ.

गया जी।राम रुचि इंटर बालिका विद्यालय में आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को समाज में व्याप्त गंभीर अपराधों—विशेष रूप से बाल विवाह एवं एसिड अटैक—के प्रति सजग और सशक्त बनाना था। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मदन किशोर कौशिक तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अरविंद कुमार दास के दिशा निर्देशानुसार किया गया है। इस कार्यक्रम में उपस्थित छात्राओं को इन जघन्य अपराधों से संबंधित कानूनी प्रावधानों, उनके अधिकारों तथा सरकारी सहायता योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई है।इस कार्यक्रम के दौरान पैनल अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह और एसिड अटैक जैसे अपराध न केवल कानूनन दंडनीय हैं, बल्कि ये समाज के लिए गंभीर अभिशाप भी हैं। बाल विवाह अधिनियम 2025 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह पूर्णतः अवैध माना गया है। उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत बाल विवाह कराने वाले अभिभावकों, रिश्तेदारों तथा पंडित या काजी जैसे व्यक्तियों के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई का प्रावधान है।उन्होंने छात्राओं को जागरूक करते हुए कहा कि बाल विवाह से न केवल उनके शिक्षा के अधिकार का हनन होता है, बल्कि इससे उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। कम उम्र में गर्भधारण से मातृ मृत्यु दर बढ़ती है तथा बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी प्रभावित होता है। इसलिए आवश्यक है कि छात्राएं स्वयं जागरूक रहें और अपने परिवार एवं समाज को भी इसके प्रति सचेत करें।इसके अतिरिक्त, एसिड अटैक जैसे जघन्य अपराध पर चर्चा करते हुए बताया गया कि यह अपराध भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अत्यंत गंभीर श्रेणी में आता है। किसी व्यक्ति पर तेजाब फेंकना या फेंकने का प्रयास करना कठोर दंडनीय अपराध है, जिसमें दोषी को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने छात्राओं को बताया कि एसिड अटैक पीड़ितों के लिए सरकार द्वारा विशेष सहायता योजनाएं संचालित की जाती हैं, जिनके अंतर्गत उन्हें मुफ्त इलाज, पुनर्वास, आर्थिक सहायता तथा कानूनी सहायता प्रदान की जाती है।यहकार्यक्रम में यह भी बताया गया कि यदि किसी छात्रा या महिला के साथ ऐसा कोई अपराध होता है, तो उसे तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके लिए 112 आपातकालीन सेवा, 1098 बाल हेल्पलाइन और 181 महिला हेल्पलाइन जैसे नंबरों का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है।छात्राओं को यह भी समझाया गया कि अपराध से बचाव के लिए सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। उन्हें अपने आसपास के संदिग्ध गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए और किसी भी प्रकार के दबाव या भय में आकर गलत निर्णय नहीं लेना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति उन्हें जबरदस्ती विवाह के लिए बाध्य करता है या किसी प्रकार से परेशान करता है, तो वे अपने शिक्षकों, अभिभावकों या प्रशासन से तुरंत संपर्क करें।इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल जानकारी देना ही नहीं था, बल्कि छात्राओं में आत्मविश्वास और साहस का संचार करना भी था, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रह सकें और किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें। इस कार्यक्रम में उपस्थित पीएलवी सूरज कुमार ने विभिन्न प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।अंत में, यह संदेश दिया गया कि एक सशक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब उसकी बेटियां शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर हों। कानून उनके अधिकारों की रक्षा के लिए है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है उनका स्वयं जागरूक होना और सही समय पर सही कदम उठाना है। इस प्रकार के विधिक जागरूकता कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैंइस आयोजन ने छात्राओं को न केवल कानून की जानकारी दी, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया कि वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने में सक्षम बनें और किसी भी प्रकार के अपराध के खिलाफ डटकर खड़ी हों। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पीएलबी सूरज कुमार अनिल कुमार राम रुचि स्कूल के शिक्षिका चित्रलेखा सहित दर्जनों की संख्या में छात्रों उपस्थित हुए हैं।