बिना वैध पहचान या मीडिया संस्थान के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को धमकाकर पैसे उगाने का प्रयास

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VISHAL VAIBHAV.

आज के समय में सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का दायरा तेजी से बढ़ा है। पत्रकारिता एक जिम्मेदार और नैतिक पेशा माना जाता है, जिसका उद्देश्य समाज को सही और तथ्यात्मक जानकारी देना होता है। लेकिन कुछ लोग बिना किसी पत्रकारिता प्रशिक्षण या वैधानिक पहचान के केवल एक मोबाइल फोन लेकर स्वयं को मीडिया प्रतिनिधि बताने लगते हैं और आम नागरिकों, व्यवसायियों तथा संस्थाओं को डराकर या बदनाम करने की धमकी देकर पैसे उगाहने का प्रयास करते हैं। ऐसे लोगों की वजह से वास्तविक और ईमानदार पत्रकारों की छवि भी धूमिल होती है तथा समाज में मीडिया के प्रति अविश्वास पैदा होता है।अमित कुमार जैसे स्वयंभू इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बताने वाले लोग, जो बिना किसी प्रमाणिकता के सोशल मीडिया पर लोगों या संस्थाओं के खिलाफ गलत और भ्रामक बातें लिखकर दबाव बनाते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होना अत्यंत आवश्यक है। यह केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का मामला नहीं है, बल्कि यह ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली जैसी गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति भी है।

यदि ऐसे फर्जी मीडिया कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होता है, तो समाज के जागरूक लोगों द्वारा उसका स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकिइससेपत्रकारिता की गरिमा बनी रहती है और आम जनता को भी राहत मिलती है। प्रशासन और पुलिस को चाहिए कि वे ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच करें और जो भी व्यक्ति बिना वैध पहचान या मीडिया संस्थान के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को धमकाकर पैसे उगाने का प्रयास करता है, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करें।साथ ही समाज के लोगों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी व्यक्ति को केवल मोबाइल या सोशल मीडिया के आधार पर पत्रकार मान लेना उचित नहीं है। यदि कोई व्यक्ति इस तरह की धमकी या दबाव बनाकर पैसे की मांग करता है, तो उसके खिलाफ तुरंत संबंधित थाने या प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना देनी चाहिए।ईमानदार पत्रकारिता समाज की आवाज होती है, लेकिन फर्जी मीडिया के नाम पर चलने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।