विष्णुपद कॉरिडोर के विकास को लेकर गया में अहम बैठक

WhatsApp Image 2026-03-09 at 7.37.40 PM

DHIRAJ.

विष्णुपद कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य गया की धार्मिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एक विश्वस्तरीय तीर्थ क्षेत्र का विकास करना है।- जिलाधिकारीगया।गया में प्रस्तावित विष्णुपद कॉरिडोर के विकास एवं सौंदर्यीकरण को लेकर सोमवार सुबह जिला पदाधिकारी, गया शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में नगर आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी सदर, विशेष कार्य पदाधिकारी, टाउन प्लानर, आर्किटेक्ट, पंडा-पुरोहित, संवाद सदन समिति के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न वार्ड पार्षदों सहित कई प्रमुख हितधारक उपस्थित रहे हैं।
इस बैठक में पिछले बैठक में लिए गए निर्णयों की समीक्षा करते हुए यह तय किया गया कि मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर स्थित 16 वेदियों (वेदियों) को यथावत रखा जाएगा। साथ ही, मंदिर परिसर की वर्तमान सीमा को आवश्यकता अनुसार विस्तारित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया है।
इस बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पिंडदान की परंपरागत व्यवस्था को बरकरार रखते हुए यह अनुष्ठान फल्गु नदी के तट पर ही कराया जाएगा, जैसा कि सदियों से होता आया है। इसके अतिरिक्त, श्मशान घाट के लिए उपलब्ध स्थान को भी विस्तारित करने की संभावना पर चर्चा हुई है।

मंदिर परिसर के निकट स्थित शिजुआर धर्मशाला को एक विरासत संरचना के रूप में संरक्षित रखने का प्रस्ताव रखा गया है। इसी प्रकार मंदिर क्षेत्र के आसपास स्थित अन्य ऐतिहासिक भवनों की पहचान कर उन्हें भी विरासत संरचना के रूप में संरक्षित करने की दिशा में कार्य करने का सुझाव दिया गया है।
इस बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मंदिर परिसर के आसपास वर्तमान में संचालित दुकानदारों और फेरीवालों को व्यवस्थित तरीके से पुनर्गठित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही पिंडदान करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त छायादार व्यवस्था (शेड) सुनिश्चित की जाएगी।
प्रस्तावित विष्णुपद कॉरिडोर को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाने के लिए कई व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएंगी, जिनमें उन्नत कैस्केड लाइटिंग सिस्टम, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, शौचालय, चेंजिंग रूम, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), भूमिगत जलनिकासी एवं सीवर नेटवर्क, सिसिटीव निगरानी, अग्निशमन केंद्र, पुलिस स्टेशन, सुरक्षा जांच चौकियां, आगंतुक सहायता केंद्र (Help Desk), लॉस्ट एंड फाउंड सेंटर तथा पार्किंग सुविधाएं शामिल होंगी। साथ ही सीताकुंड, मंगलागौरी और अक्षयवट को भी विष्णुपद कॉरिडोर परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव पर सहमति बनी।
इस बैठक में उपस्थित सदस्यों ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि पिंडदान और पितृपक्ष से जुड़ी धार्मिक एवं पौराणिक परंपराओं की पवित्रता और सांस्कृतिक महत्व को अक्षुण्ण रखते हुए ही विकास कार्य किए जाएं।
इस बैठक के दौरान मुख्य रूप से इस बात पर चर्चा हुई कि मंदिर परिसर के विकास और सौंदर्यीकरण के साथ-साथ पितृपक्ष और कर्मकांड की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को सुरक्षित रखा जाए।
कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि सीताकुंड बाईपास और मानपुर बाईपास के बीच फल्गु नदी के मध्य भाग में भगवान विष्णुपद की एक भव्य पेडेस्टल प्रतिमा को पुनः स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाए।
इसके अतिरिक्त, फल्गु नदी में जमा स्थिर जल को साफ रखने के लिए एरेटर लगाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। इस संबंध में कार्यरत परामर्शदाता संस्था एचसीपी डीजाइन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड से अपने प्रस्तावित योजना में इसे शामिल करने का आग्रह किया गया है।
जिला प्रशासन ने सभी संबंधित पक्षों के सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि विष्णुपद कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य गया की धार्मिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एक विश्वस्तरीय तीर्थ क्षेत्र का विकास करना है।