शब्दवीणा के नवगीत दिवस समारोह में साहित्यिक परिचर्चा एवं कवि सम्मेलन का हुआ भव्य आयोजन

विश्वनाथ आनंद .
गया जी( बिहार )-राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ की पश्चिम बंगाल प्रदेश समिति के तत्त्वावधान में एवं प्रदेश अध्यक्ष राम नाथ बेख़बर, उपाध्यक्ष हीरा लाल साव, संयोजक देवेश मिश्र, संगठन मंत्री डॉ शिव प्रकाश दास, कोषाध्यक्ष रामाकांत सिन्हा, साहित्य मंत्री ज्ञान प्रकाश पांडेय एवं प्रचार मंत्री डॉ संजीव दुबे के संयुक्त संयोजन में मॉर्निग ग्लोरी स्कूल, रिसड़ा में प्रथम नवगीत दिवस समारोह में साहित्यिक परिचर्चा एवं कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ शब्दवीणा गीत एवं सरस्वती वंदना से हुआ। गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि डॉ. एस. आनंद सिंह को उनकी अनवरत साहित्य साधना के लिए ‘शब्दवीणा साहित्य गौरव सम्मान-2026’ से विभूषित किया गया। डॉ सिंह को मंचासीन कार्यक्रम अध्यक्ष ‘सदीनामा’ के संपादक जीतेन्द्र जितांशु, मुख्य अतिथि सेराज खान बातिश, विशिष्ट अतिथि शकील गोंडवी एवं शंकर रावत सहित शब्दवीणा पश्चिम बंगाल प्रदेश समिति के नेतृत्वकर्त्ताओं ने शॉल, विशेष स्मृति चिन्ह तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान करके सम्मानित किया। डॉ आनंद ने शब्दवीणा परिवार के प्रति प्राप्त अगाध स्नेह और सम्मान के लिए हार्दिक कृतज्ञता जताई। आमंत्रित सभी रचनाकारों को अंगवस्त्र प्रदान करके सम्मानित किया गया। मंचासीन वक्ताओं ने गीत और नवगीत पर उदाहरण सहित विचार रखे। नवगीत को काव्य विधा की नई और पुरानी धाराओं के संगम के रूप में बतलाया।

वक्ताओं ने कहा कि नवगीत हिंदी काव्य की एक आधुनिक विधा, है जो ‘नई कविता’ के समानांतर विकसित हुई। इसमें आधुनिक संवेदनाएँ लोक-शैली में पिरोई जाती हैं, ताकि वे अधिक लोगों तक पहुँच सकें और उनका आनंद लिया जा सके। नवगीत लेखन का उद्देश्य लोकगीतों की परंपरा और आधुनिक भावबोध को मिलाकर सरल, गेय और समकालीन विषयों पर गीत लिखना रहा है। इसमें सामाजिक यथार्थ, लोक जीवन और मानवीय संवेदनाओं की प्रधानता होती है। इसमें एक मुखड़ा और कई छंदबंद्ध अंतरे होते हैं, जो लय, गति, और ताल से बंधे होते हैं, लेकिन पारंपरिक छंदों से मुक्त होते हैं। वक्ताओं ने नवगीत को नई कविता की जटिलता के विरोध में उत्पन्न काव्य विधा बतलाया, जिसमें आधुनिक जीवन के यथार्थ को सरल शैली में अभिव्यक्त किया जाता है। इसमें मिट्टी से जुड़ाव का बोध होता है। सामाजिक असंतोष, वंचितों के प्रति करुणा, और मानवीय भावनाओं की गहरी अभिव्यक्ति होती है। इसमें भावुकता के साथ युग बोध और दर्शन का भी समावेश होता है।

कार्यक्रम का संचालन राम नाथ बेख़बर एवं डॉ शिव प्रकाश दास ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम के सफल और सुनियोजित आयोजन पर शब्दवीणा की संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने शब्दवीणा पश्चिम बंगाल प्रदेश इकाई को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। कवि सम्मेलन में डॉ एस.आनंद, ज्ञान प्रकाश पाण्डेय, नन्दलाल रौशन, कमला पति पाण्डेय निडर, रमाकांत सिन्हा, राम नाथ बेख़बर, डॉ शिव प्रकाश दास, संजीव दुबे, हीरालाल साव, देवेश मिश्रा, शंकर रावत, डॉ. अजय वर्मा, भारती मिश्रा, शकील गोंडवी, जीतेन्द्र जितांशु, अमित कुमार अम्बष्ट, सेराज खान बातिश, शिवम तिवारी, निधि साव ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ पढ़ीं। बतौर श्रोता मॉर्निंग ग्लोरी स्कूल के अध्यक्ष अशोक कुमार दुबे, सचिव संजय दुबे, प्रिंसपल सोमा नाथ, समाज सेवी सुनील सिन्हा, वार्ड पार्षद सुखसागर मिश्रा, सुरेन्द्रनाथ श्रीवास्तव, सुमेरलाल श्रीवास्तव, तारकेश्वर श्रीवास्तव, बी.एन. तिवारी, हरेंद्र सिंह, अवधेश केसरी, राम सुरेश सिंह, डॉ सागर तिवारी, अशोक पाण्डेय की उपस्थिति रही।

डॉ एस आनंद सिंह के नवगीत “उचर बैठो कागा, क्या बोले मुंडेरे” ,” जुठार गया सुगना पहला टिकोरा”, “बादल बांध लो” एवं “पल का परिचय” को, राम नाथ ‘बेख़बर’ के नवगीत “बुधुआ घर में पड़ा अकेला, गाये मन का गीत। लेटे-लेटे फिर से उसने मन का पत्रा बाँचा, खोज रहा है रात-रात भर सपने वाला साँचा। जोड़ रहा है घड़ी-घड़ी वह, स्वप्न महल की भीत”, ज्ञान प्रकाश पांडेय की पंक्ति “सभी यहाँ दंडवत कर रहे, सच कहने से सभी डर रहे” व “तुम शासन के सर्वे-सर्वा, जिसको चाहो बोटी बाँटो। जिसकी चाहो रोटी छीनो, जिसको चाहो काटो-छाँटो। न्यायोचित सब तेरी खातिर तुम इज्जत वाले खुद्दार। हम सब तो हैं कुकुर-बिलार” पर खूब वाहवाहियाँ लगीं।नन्दलाल रौशन की “तेरी दुनिया खूब तमाशा, अमृत में विष भरा हुआ सा” एवं हीरा लाल साव की “गम फूलों का है, बबूलों का है। बेईमानी का कुछ, उसूलों का है” को भी दर्शकों तथा श्रोताओं से काफी सराहना मिली।

कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से किया गया, जिससे जुड़कर महावीर सिंह वीर, डॉ रश्मि प्रियदर्शनी, अरुण अपेक्षित, पुरुषोत्तम तिवारी, राम पुकार सिंह, प्रो. सुबोध कुमार झा, जैनेन्द्र कुमार मालवीय, नंद किशोर जोशी, पी. के. मोहन, डॉ रवि प्रकाश, डॉ कनक लता तिवारी, दीपक कुमार, ललित शंकर, फतेहपाल सिंह सारंग, अनुराग सैनी मुकुंद, अनुराग दीक्षित, डॉ संतोष संप्रीति, रामदेव शर्मा राही, डॉ विजय शंकर ने अपनी सारगर्भित टिप्पणियों द्वारा रचनाकारों का उत्साहवर्द्धन किया।

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