​”स्वर लहरियों से सजी माता की चौकी, माँ मथुरासिनी के जागरण में उमड़ा आस्था का जन-सैलाब”

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DHIRAJ.

गया। माहुरी वैश्य मंडल, गया जी द्वारा आयोजित 42वाँ माँ मथुरासिनी महोत्सव के अंतर्गत बीती रात माहुरी वैश्य मंडल भवन, गुरुद्वारा रोड, गोसाईबाग में भव्य माता जागरण का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ है।कार्यक्रम का शुभारंभ रात्रि लगभग 8:00 बजे माता के विधिवत पूजन-अर्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात भक्ति गीतों, झांकियों और मनमोहक प्रस्तुतियों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया है।इस भव्य जागरण में विशेष रूप से कानपुर (उत्तर प्रदेश) से आई आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। माता की दिव्य झांकियों और भक्ति संगीत ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया है।
जागरण में विभिन्न स्थानों से आए भजन गायकों ने अपनी मधुर वाणी से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। इसमें आरा, बक्सर और गया से आए भजन गायकों ने माता के एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत किए हैं। भजनों की ऐसी प्रस्तुति हुई कि श्रद्धालु पूरी रात माता की भक्ति में लीन होकर झूमते रहे हैं।

रात्रि में आरंभ हुआ यह भव्य कार्यक्रम सुबह लगभग 6:00 बजे तक निरंतर चलता रहा। आश्चर्य की बात यह रही कि पूरी रात कार्यक्रम चलने के बावजूद श्रद्धालुओं की भीड़ में कहीं भी कमी नहीं आई है।देर रात से लेकर सुबह तक भक्तों की भीड़ लगातार उमड़ी रही और सभी माता क जयकारों के साथ भक्ति में डूबे रहे।
अंत में माता के विदाई गीत और मंगल आरती के साथ इस भव्य जागरण को भावपूर्ण रूप से अंतिम रूप दिया गया है।
इस भव्य जागरण को सफल बनाने में माहुरी वैश्य मंडल, माहुरी वैश्य मंडल नवयुवक समिति, महिला समिति तथा मंडल के समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्यों का सराहनीय सहयोग रहा है। सभी ने मिलकर इस आयोजन को अत्यंत भव्य और ऐतिहासिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मंडल की ओर से जानकारी दी गई कि महोत्सव के तीसरे दिन दिनांक 15 मार्च 2026 (रविवार) को दोपहर 2:00 बजे से भव्य महा भंडारा का आयोजन किया जाएगा। मंडल ने समस्त श्रद्धालुओं और समाज के लोगों से आग्रह किया है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर माता का प्रसाद ग्रहण करें तथा महा भंडारे को और भी भव्य बनाएं।इस भव्य जागरण ने पूरे क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना दिया तथा श्रद्धालुओं के मन में माँ मथुरासिनी के प्रति अटूट आस्था और विश्वास को और भी प्रगाढ़ कर दिया है।