शेरघाटी अनुमंडलीय अस्पताल में नवजात की मौत से स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
CHANDAN MISHRA.
शेरघाटी। अनुमंडलीय अस्पताल में नवजात की मौत के बाद मामला केवल एक परिवार के शोक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों के आरोपों ने अस्पताल प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही की प्रणाली को कठघरे में ला खड़ा किया है। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर आक्रोश और चिंता का माहौल बना हुआ है।परिवार का कहना है कि प्रसव के समय पर्याप्त चिकित्सकीय सतर्कता नहीं बरती गई। उनका आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं थे और न ही प्रसूता को समुचित देखभाल मिल सकी। परिजनों के अनुसार, बार-बार अनुरोध के बावजूद चिकित्सा कर्मियों ने अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई।बाद में नवजात की मौत की सूचना मिलने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया ने अस्पताल की कार्यशैली पर कई प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।घटना के बाद अस्पताल परिसर में घंटों तनाव की स्थिति बनी रही।
आक्रोशित परिजन कार्रवाई के लिए अड़े रहे।
आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा। अधिकारियों ने मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पहले भी कई घटना हो चुकी है।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अस्पताल में अव्यवस्था और लापरवाही की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन ठोस सुधार नहीं हो पाया है।
अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजो के परिजनों ने लगाया आरोप।
कुछ अन्य मरीजों के परिजनों ने भी अस्पताल में कथित अव्यवस्था और अनौपचारिक रूप से पैसे मांगने जैसी शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त और सुलभ स्वास्थ्य सेवा का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई देती है।
संसाधनों की कमी, कर्मियों की अनुपस्थिति और निगरानी तंत्र की कमजोरी जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।
परिजनो से मिले विधायक
मामले की जानकारी मिलने पर शेरघाटी के विधायक उदय कुमार सिंह अस्पताल पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए।
विधायक ने कहा कि यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने उच्च अधिकारियों से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग करने की बात भी कही।
यह घटना अब केवल एक चिकित्सकीय त्रासदी नहीं रह गई है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पारदर्शिता, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।