कपिल देव केवल एक क्रिकेटर नहीं बल्कि भारतीय खेल चेतना के प्रतीक है- ई. हिमांशु शेखर
विश्वनाथ आनंद .
टिकारी (बिहार)- कपिलदेव केवल एक क्रिकेटर नहीं बल्कि भारतीय खेल चेतना के प्रतीक है. उक्त बातें साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता केसपा निवासी ई. हिमांशु शेखर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहीं. उन्होंने आगे कहा कि भारत में क्रिकेट केवल खेल नहीं, बल्कि जन-जन की आस्था भी बन चुका है। इस आस्था को आत्मविश्वास, आक्रामकता और विजयी मानसिकता देने का श्रेय जिस व्यक्तित्व को जाता है, वे हैं महान ऑलराउंडर कपिल देव। 6 जनवरी 1959 को जन्मे कपिल देव को उनके जन्मदिवस पर स्मरण करना भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम अध्याय को नमन करने जैसा है।
25 जून 1983 से पहले भारतीय क्रिकेट को ‘बेबी’ कहा जाता था, लेकिन कपिल देव की कप्तानी में विश्वकप जीतकर भारत ने यह साबित कर दिया कि वह अब परिपक्व और आत्मविश्वासी क्रिकेट राष्ट्र है। जिम्बाब्वे के खिलाफ 175* रन की ऐतिहासिक पारी और फाइनल में विवियन रिचर्ड्स का वह अविस्मरणीय कैच आज भी क्रिकेट प्रेमियों के स्मृति-पटल पर अंकित है। उसी जीत ने भारतीय क्रिकेट की दिशा और दशा दोनों बदल दीं।
‘हरियाणा हरिकेन’ के नाम से मशहूर कपिल देव ने बेजान भारतीय पिचों पर तेज गेंदबाजी को नई पहचान दी। टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में रन और विकेट—दोनों में उन्होंने जो मानक स्थापित किए, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। लॉर्ड्स में भारत की पहली टेस्ट जीत हो या फॉलोऑन से बचाने के लिए लगातार चार छक्के—कपिल देव ने हर संकट में नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया।
विडंबना यह है कि भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले इस महान खिलाड़ी को वह राष्ट्रीय सम्मान और संस्थागत मान्यता नहीं मिल सकी, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। खेल प्रशासन में खिलाड़ियों की भागीदारी, श्रृंखलाओं और पुरस्कारों का नामकरण महान खिलाड़ियों के नाम पर तथा खेल संस्कृति को मजबूत करने की ठोस नीति—ये सभी आज की आवश्यकता हैं।
कपिल देव केवल एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि भारतीय खेल चेतना के प्रतीक हैं। उनका जीवन और संघर्ष यह सिखाता है कि आत्मविश्वास, मेहनत और नेतृत्व से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। निस्संदेह, कपिल देव क्रिकेट जगत के महानायक हैं और उनका योगदान सदैव युवाओं को प्रेरित करता रहेगा।