वीरता और राष्ट्र प्रेम की अमर कथा — ‘मुंडमाल’
विश्वनाथ आनंद .
टिकारी( बिहार)- प्रसिद्ध कथाकार शिवपूजन सहाय द्वारा रचित कहानी ‘मुंडमाल’ वीरता, त्याग और राष्ट्रप्रेम की अद्भुत गाथा है। यह कथा मुगलों के आक्रमण के दौर में राष्ट्र की रक्षा, कर्तव्यनिष्ठा और प्रेम की सर्वोच्च पराकाष्ठा को उजागर करती है। कहानी यह संदेश देती है कि सच्चा प्रेम केवल देह तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समर्पण और बलिदान की चरम सीमा तक पहुँच सकता है। इसमें रानी अपने प्रिय (चूड़ावत जी) की कर्तव्यनिष्ठा को सर्वोपरि मानते हुए अपना शीश अर्पित कर देती हैं—जो त्याग और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है।प्रखंड अंतर्गत वीरांगनाओं की पावन धरती रेवई गाँव स्थित राजकीय मध्य विद्यालय के प्रांगण में आयोजित ‘कहानी विद कॉफी’ की 17वीं कड़ी में ‘मुंडमाल’ का पाठ एवं विस्तृत चर्चा की गई। करया गाँव निवासी एवं मगध इंटर महाविद्यालय, शकुराबाद के सेवानिवृत्त प्राचार्य शिव शंकर सिंह ने कहानी में आंचलिक शब्दों के सजीव प्रयोग की सराहना की। उन्होंने कहानी के विभिन्न आयामों पर गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह कथा रेवई गाँव के गौरवपूर्ण इतिहास को सामने लाती है। उन्होंने बताया कि 14वीं शताब्दी में इस गाँव की लगभग सात सौ वीरांगनाओं ने आत्मसम्मान और नारी धर्म की रक्षा के लिए जौहर किया था, जो अद्वितीय साहस का प्रतीक है।कार्यक्रम में शहर के चर्चित हिंदी शिक्षक प्रो. राजन ने कहा कि यह कहानी भारत के आत्मगौरव को बढ़ाने वाली है और यहाँ की संस्कृति में बसी हुई अद्भुत शौर्य, साहस और समर्पण की अद्भुत गाथा है।
कार्यक्रम की शुरुआत पवन सर द्वारा प्रभावशाली कहानी पाठ से हुई। सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु शेखर ने कहा कि यह कहानी राष्ट्रप्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाती है। गया के उद्यमी सुरेश सिंह ने कार्यक्रम में व्यक्त साहित्यिक विचारों को संकलित कर प्रकाशित करने का सुझाव दिया।पतरातू थर्मल पावर (झारखंड) से सेवानिवृत्त राम प्रसाद सिन्हा ने ग्रामीण क्षेत्र में इस स्तर के साहित्यिक आयोजन को बड़ी उपलब्धि बताया। नारायण मिश्रा ने कहा कि कहानी में प्रेम रस और वीर रस का अद्भुत समन्वय है। कई श्रोता ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े और अपनी प्रतिक्रियाएँ साझा कीं।कार्यक्रम का संचालन आयोजक संजय अथर्व ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन स्थानीय निवासी एवं स्वामी विवेकानंद मिशन स्कूल के निदेशक मुकेश कुमार ने किया। समापन के उपरांत सभी उपस्थित लोगों ने जौहर मंदिर के दर्शन किए और गाँव के समग्र विकास की आवश्यकता पर बल दिया।