भगवान राम व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नामों के बीच देश के मजदूरों को पीसना चाहती है केन्द्र सरकार – विजय कुमार मिट्ठू

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विश्वनाथ आनंद .
गया जी (बिहार)- भगवान राम व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नामो के बीच देश के मजदूरों को पीसना चाहती है केंद्र सरकार. उक्त बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाते हुए कहे. उन्होंने आगे कहा कि पिछले बीस वर्षों से भारत के मजदूरों की जीवन रेखा रही मनरेगा में मोदी सरकार के प्रस्तावित बदलाव देश के मजदूरों के संवैधानिक अधिकार पर हमला है।बिहार प्रदेश कॉंग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कॉंग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, राम प्रमोद सिंह, युगल किशोर सिंह, विद्या शर्मा, धर्मेंद्र कुमार निराला. शिव कुमार चौरसिया आदि ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पिछले बारह वर्षों से इतिहास बनाने के बजाय इतिहास मिटाने का काम करते आ रही, अब उससे संतुष्टि नहीं हुई तो भगवान राम एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नामों पर राजनीति रोटी सकने, देश के मजदूरों को पीसने का काम कर रही है।नेताओं ने कहा कि मनरेगा में बदलाव से मजदूरों के काम के अधिकार को छीनना, न्यूनतम मजदूरी पाने का अधिकार छीनना, ग्रामपंचायत को दरकिनार करना.

राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने का काम कर रही है।नेताओं ने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा देशभर में अब भगवान राम और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बीच तुलनात्मक बातें कर कॉंग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों पर निशाना साधा जा रहा है, जबकि मनरेगा देश के गरीब परिवारों के भरन पोषण का एक मात्र अधिकार था, जिसे भगवान राम के नाम पर मजदूरों के अधिकार में कटौती कर डराने का काम कर रहे हैं।नेताओं ने कहा कि भारत के कार्ल मार्क्स कहे जाने वाले, किसान मजदूर के मसीहा स्वामी सहजानंद सरस्वती का कथन भगवान और रोटी दोनों बड़े है, परंतु रोटी भगवान से ज्यादा जरूरी है पूरी तरह इस मामले में प्रासंगिक है।नेताओं ने कहा कॉंग्रेस पार्टी 10 जनवरी से मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत 25 फरवरी यानी 45 दिनों टन गांव, पंचायत, प्रखंड, जिला, प्रदेश एवं देश स्तर तक चरणबध्द आंदोलन चला कर काम की गारन्टी, मजदूरी की गारंटी , जवाबदेही की गारंटी, मनरेगा में किए गए बदलाव की तत्काल वापसी, काम की संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली तथा न्यूनतम मजदूरी 400 रुपया की मांग को बुलंद करेगी।