माइंडफुलनेस पर वैश्विक मंथन: आईआईएम बोधगया ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से शोध और नेतृत्व को दी नई दिशा
विश्वनाथ आनंद
गया जी (बिहार )-आईआईएम बोध गया ने माइंडफुलनेस पर अंतरराष्ट्रीय शोध सम्मेलन (IRCM) 2026 का उद्घाटन किया। यह इस द्विवार्षिक प्रमुख सम्मेलन का तीसरा संस्करण था, जिसका उद्देश्य माइंडफुलनेस पर विभिन्न विषयों में शोध को आगे बढ़ाना है। यह दो दिवसीय सम्मेलन हाइब्रिड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) रूप में आयोजित किया गया। इसमें भारत और विदेश से शिक्षाविद, शोधकर्ता, विशेषज्ञ और छात्र शामिल हुए। जापान, वियतनाम और न्यूजीलैंड से भी प्रतिभागियों ने भाग लिया।इस सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर अच्छा प्रतिसाद मिला। कुल 255 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए, जो पिछले संस्करण की तुलना में तीन गुना से अधिक थे। यह बढ़ती भागीदारी दिखाती है कि प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान और अन्य संबंधित क्षेत्रों में माइंडफुलनेस आधारित शोध की महत्ता लगातार बढ़ रही है।
सम्मेलन का उद्घाटन आईआईएम बोध गया की निदेशक डॉ. विनिता एस. सहाय ने किया। इस अवसर पर सम्मेलन संयोजक डॉ. रेम्या लथाभवन और डॉ. टीना भारती भी उपस्थित थीं। मुख्य वक्ताओं में सेंट मैरीज़ कॉलेज ऑफ कैलिफ़ोर्निया की डॉ. ज्योति बच्चानी, आईआईएम अहमदाबाद के डॉ. विशाल गुप्ता और आईआईएम कलकत्ता की डॉ. रम्या तारकड वेंकटेश्वरन शामिल थे। इन सभी ने अपने व्याख्यान में ध्यान और चिंतन की परंपराओं को आधुनिक शोध के साथ जोड़ने पर बल दिया, ताकि संस्थाओं की कार्यक्षमता और समाज के कल्याण को बेहतर बनाया जा सके।
अपने संबोधन में डॉ. विनिता एस. सहाय ने कहा कि “समय की कसौटी ही किसी भी बड़े हित की असली परीक्षा है।” उन्होंने माइंडफुलनेस को एक ऐसी पुरानी और प्रमाणित जीवन-दर्शन बताया, जो आज भी सार्थक जीवन और नेतृत्व का मार्ग दिखाती है। डॉ. ज्योति बच्चानी ने कहा, “ज्ञान शाश्वत है, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अस्थायी है।” उन्होंने यह भी बताया कि बोध गया जैसे ऐतिहासिक स्थान पर इस तरह की चर्चा का आयोजन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह स्थान माइंडफुलनेस की ऐतिहासिक उत्पत्ति से जुड़ा है।
सम्मेलन में 12 अलग-अलग विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। इन विषयों में नेतृत्व, संगठनात्मक व्यवहार, वित्त, शिक्षा, निर्णय-निर्माण और सतत विकास शामिल थे। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन प्रस्तुत किए और बताया कि सजगता और आत्म-चिंतन के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में शोध की कमियों को दूर किया जा सकता है और व्यावहारिक समाधान निकाले जा सकते हैं।
सम्मेलन से पहले आयोजित कार्यशालाओं में व्यावहारिक सीखने पर जोर दिया गया। आईआईटी और आईआईएम के पूर्व छात्र तथा माइंडफुलनेस कोच श्री शिशिर आर्य ने पेशेवर जीवन और सजग जीवनशैली के संबंध पर अनुभव आधारित सत्र लिए। आईआईएम इंदौर की प्राध्यापक और मधुबनी कला की विशेषज्ञ डॉ. सुरभि दयाल ने माइंडफुलनेस, कला और जीवनशैली के बीच संबंध पर चर्चा कराई। इन कार्यशालाओं ने प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान को अपने भावनात्मक और मानसिक अनुभवों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।
सम्मेलन का समापन न्यूजीलैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ वाइकाटो के डॉ. ओलेग मेदवेदेव, भारत और मलेशिया से संबद्ध डॉ. प्राची ठाकुर, तथा इंडोनेशिया की यूनिवर्सितास इंडोनेशिया की डॉ. यांकी हार्तिजास्ती के संबोधनों के साथ हुआ। उन्होंने वैश्विक शोध सहयोग के नए अवसरों और मजबूत संस्थानों तथा समाज के निर्माण में माइंडफुलनेस की भूमिका पर प्रकाश डाला। समापन सत्र में सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन समिति के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया गया।
आज जब दुनिया तेजी से जटिल होती जा रही है, ऐसे समय में IRCM 2026 ने चिंतन, स्पष्ट सोच और सजग भागीदारी के महत्व को दोहराया। माइंडफुलनेस आईआईएम बोध गया का एक मुख्य मूल्य है, और संस्थान इसे शिक्षण, शोध और नेतृत्व विकास में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि जिम्मेदार, आत्म-जागरूक और समाज के प्रति संवेदनशील नेता तैयार किए जा सकें।