विज्ञान मानवता का वरदान नहीं अभिशाप बनता जा रहा है-कुमारी पियूषी

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विश्वनाथ आनंद .
गया जी (बिहार)-छात्र नेत्री जिला कौटिल्य मंच के सचिव पियूषी कुमारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर कहीं हैं कि एक और देश में विज्ञान के क्षेत्र में नित्य प्रति नए-नए अविष्कार से राष्ट्र को गौरवान्वित कर दुनिया को चमत्कृत किया है। सूरज- चांद पृथ्वी- समुद्र के बारे में गहराई से अध्ययन कर आशातीत सफलता भी प्राप्त किया है, किंतु ठीक उसके विपरीत मानव मूल्यों एवं प्रकृति के साथ बेलगाम अविवेकपूर्ण कार्रवाई से मानवता का शांति चैन छीन लिया है संपूर्ण प्राणियों के लिए संहारक बनता जा रहा है, जो किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

प्रकृति के बने विधान को चुनौती देकर उसकी लक्ष्मण रेखा को पार करने का हम उसके दुष्परिणामों को देख रहे हैं, भोग रहे हैं। जलवायु परिवर्तन बढ़ते प्रदूषण अनाचार अत्याचार से जनजीवन को नाश के कगार पर खड़ा कर दिया है। आज यह राष्ट्रीय विज्ञान विज्ञान दिवस इसलिए महत्वपूर्ण है कि हमें यह याद दिलाता है कि विज्ञान मानव जीवन को बेहतर बनाने का लक्ष्य कैसे पूरा करे और इसमें बुद्धिजीवियों की समाजसेवको की कैसे भागीदारी निभाई जा सकती है जिससे आदमी सुख शांति और समृद्धि प्राप्त कर सके प्राणियों का भला हो सके।