कोई भी प्राचीन पांडुलिपि जो कम से कम 75 वर्ष पुरानी हो है, तो उसे प्रशासन के साथ साझा करें- जिलाधिकारी

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DHIRAJ.
गया,। जिला प्रशासन गया द्वारा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘ज्ञान भारतम’ के अंतर्गत जिले की प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने और उन्हें डिजिटल रूप में संरक्षित करने का विशेष अभियान शुरू किया गया है। जिला पदाधिकारी गया शशांक शुभंकर ने इस संबंध में जिले के समस्त नागरिकों, धार्मिक संस्थाओं और प्रबुद्ध वर्ग से सहयोग की अपील की है।ज़िला पदाधिकारी गया शशांक शुभंकर ने आज सुबह समाहरणालय स्थित ज़िला पदाधिकारी के पुस्तकालय का निरीक्षण किया। इस पुस्तकालय में अति प्राचीन किताबें एवं विभिन्न पुराने अलग अलग भाषाओं में लिखी हुई किताबों को देखा है। उन्होंने प्रभारी पदाधिकारी सामान्य शाखा अर्चना कुमारी एवं अपर समाहर्ता विधि व्यवस्था मो० सफीक को निर्देश दिए हैं कि सभी प्राचीन किताबों को अच्छे तरीके से स्कैन करवा कर भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड करवाये। बड़ी संख्या में प्राचीन भाषाओं की किताबें यहां रखी हुई है। इस अवसर पर वरीय उप समाहर्ता धनराज कुमार भी उपस्थित थे। ज्ञान भारतम मिशन क्या है?

ज्ञान भारतम मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत, जो प्राचीन पांडुलिपियों के रूप में बिखरी हुई है, उसे आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से सुरक्षित करना है। ये पांडुलिपियाँ ताड़ के पत्तों, भोजपत्र, कपड़े या पुराने कागजों पर लिखी हो सकती हैं, जिनमें हमारा प्राचीन ज्ञान, साहित्य, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान और क्षेत्रीय इतिहास समाहित है।
गया में क्रियान्वयन की रूपरेखा:जिला पदाधिकारी ने इन ऐतिहासिक दस्तावेजों की खोज के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। मिशन की सफलता के लिए प्रशासन निम्नलिखित स्रोतों पर विशेष ध्यान दे रहा है:
पुराने पुस्तकालय एवं संग्रहालय: जिले के प्राचीन शैक्षणिक संस्थानों और व्यक्तिगत संग्रहों की पहचान है।
धार्मिक स्थल: विष्णुपद मंदिर, मंगला गौरी मंदिर, महाबोधि मंदिर, केसपा मंदिर टेकारी, बोधगया मठ, गुरपा मंदिर, बेला काली मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों, मठों और मस्जिदों में उपलब्ध पांडुलिपियों का संकलन।
राजसी विरासत: टिकारी राज एवं अन्य राजाओं जैसे ऐतिहासिक घरानों के अभिलेखागार।
जन-भागीदारी: सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी अपने क्षेत्र के पंचायतों के मुखियाओं के साथ बैठक कर ग्रामीण क्षेत्रों में छिपे हुए प्राचीन दस्तावेजों की जानकारी जुटाना।
जिला पदाधिकारी की अपील:
जिला पदाधिकारी गया ने कहा है कि “हमारी पांडुलिपियाँ हमारे गौरवशाली अतीत का हिस्सा हैं। ‘ज्ञान भारतम’ के माध्यम से हम इन्हें आगामी पीढ़ियों के लिए डिजिटल रूप में सुरक्षित करना चाहते हैं। उन्होंने गया के निवासियों से अपील किया है कि यदि आपके पास या आपके संज्ञान में ऐसी कोई भी प्राचीन पांडुलिपि जो कम से कम 75 वर्ष पुरानी हो है, तो उसे प्रशासन के साथ साझा करें।” या स्वम् भी भारत सरकार के “ज्ञान भारतम्” मोबाइल एप जो गूगल प्ले स्टोर पर जाकर ज्ञान भारतम https://play.google.com/store/apps/details?id=com.gyanbharatam.app पर अपलोड कराना सुनिश्चित करें।
योगदानकर्ताओं का सम्मान:
इस मिशन में सहयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति, संगठन या निजी संग्रहकर्त्ता को जिला पदाधिकारी द्वारा सम्मानित किया जाएगा। जिला प्रशासन यह स्पष्ट करता है कि पांडुलिपियों का स्वामित्व मालिकों के पास ही रहेगा; प्रशासन केवल उनका वैज्ञानिक तरीके से डिजिटलीकरण करेगा ताकि उन्हें ‘राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी’ का हिस्सा बनाया जा सके।
संपर्क एवं जानकारी के लिए नागरिक संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी, अनुमण्डल पदाधिकारी, जिला कला संस्कृति पदाधिकारी से व्यक्तिगत रूप से या कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
जिला पंचायती राज पदाधिकारी द्वारा मनु लाल पुस्तकालय मुरारपुर में जाकर पुराने प्राचीन किताबें हस्तलिखित दस्तावेजों का अवलोकन किया गया है।
निदेशक राष्ट्रीय नियोजन कार्यक्रम जिला ग्रामीण विकास अभिकरण धर्मेंद्र सिंह द्वारा मगध विश्वविद्यालय में जाकर वहां प्राचीन काल के किताबें, हस्तलिखित दस्तावेजों का अवलोकन किया गया है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी कृष्ण मुरारी गुप्ता द्वारा बोधगया मठ जाकर अति प्राचीन किताबें एवं हस्तलिखित दस्तावेजों का अवलोकन किया गया है।