संपूर्ण राज्य में संचालित इ रिक्सा को पूर्व के हाथ रिक्सा की भांति सरकारी स्थायी पास निर्गत कर ठेकेदारी सिस्टम से मुक्त करे सरकार-काँग्रेस

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विश्वनाथ आनंद .
गया जी ( बिहार)-पूरे बिहार में हाथ रिक्सा की पुरानी परम्परा लगभग समाप्त हो गई है, तथा उसके जगह पर बैट्री से संचालित इ रिक्सा अब सड़क से गली, गांवों, घरों तक 24 घंटे चल रही है, जो शहर, ग्रामीण इलाके के गरीब- मध्यमार्गी परिवार का लाइफ लाइन की तरह एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने- जाने की सबसे सुगम व्यवस्था है।
बिहार प्रदेश काँग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू, मोहम्मद खान अली, दामोदर गोस्वामी, विपिन बिहारी सिन्हा, विशाल कुमार, सुजीत कुमार गुप्ता, डी एन पी शर्मा, अमरजीत कुमार, विनोद बनारसी, सूरज कुमार शर्मा, अरविंद सिन्हा आदि ने कहा कि सूबे में पहले हाथ रिक्सा चलाने वाले गरीब मजदूर तथा शिक्षित बेरोजगार लोग द्वारा संचालित इ रिक्सा से दिनभर में कई स्थानो पर ठेकेदार द्वारा ठेकेदारी के रूप में लगभग 100 रुपया लेने से उनके कमाई का 25 % हिस्सा उसी में चला जाता है।

नेताओं ने कहा कि राज्य में संचालित इ रिक्सा को नगर निगम, नगर परिषद एवं नगर पंचायत द्वारा पूर्व की भांति जैसे हाथ रिक्सा पर पहले एक वर्ष के लिए एक मुस्त 300 रुपया लगाता था उसी के तर्ज़ पर इ रिक्सा से प्रति दिन 10 रुपया, यानी मासिक 300 रुपया, सालाना 3600 रुपया लेकर उसी तरह एक वर्ष का एक मुस्त 3600 रुपया लेकर पास निर्गत करने की मांग सरकार एवं नगर निकायों से किया है, जिसे नगर निकायों को भी अच्छी आमदनी हो जायेगी तथा बेरोजगार, गरीब ई रिक्सा चालकों को काफी सहूलियत होगी तथा वो रिक्सा चला कर अपने परिवार का भरण पोषण बेहतर ढंग से कर सकेंगे।
नेताओं ने कहा कि आए दिन यह भी चर्चा होते रहता है कि एक जिला का इ रिक्सा दुसरे जिला में चल रहा है, जिस समस्या का भी अपने- आप समाधान हो जाएगा क्योंकि सभी इ रिक्सा का स्थानीय नागर निकायों से रजिस्ट्रेशन तथा पास लगे।