महावीर के विचार दर्शन से ही सृष्टि को विनाश विध्वंस से बचाई जा सकती है -डॉक्टर विवेकानंद मिश्र
विश्वनाथ आनंद
गया जी ( बिहार)-गया जी स्थानीय डॉ.विवेकानंद पथ में भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के संयुक्त तत्वाधान में जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की पावन जयंती कृतज्ञता दिवस के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर महासभा एवं मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विवेकानंद मिश्र ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज संपूर्ण विश्व मानवीय मूल्यों के जिस संकट के दौर से गुजर रहा है इससे उबरने के लिए भगवान महावीर के शाश्वत स्वरूप को जानने की महती आवश्यकता है । डॉ मिश्र ने आगे कहा की महावीर के विचार “जीयो और जीने दो” मानव जीवन का मूल मंत्र है जिसे दुर्भाग्यवश आज हम उन सभी मानवीय गुणो को जिसमें सेवा, समर्पण, मानवता जैसी मूल भावना निहित थी, विलुप्त हो गई है। आज स्वतंत्रता, स्वच्छंदता के रूप में हावी है। जिसके कारण रक्तबीज की तरह आसुरी शक्ति का प्रभाव निरंतर बढ़ती जा रही है। यह मानवता के लिए घोर चिंता का विषय हैमहासभा एवं मंच के संरक्षक प्रसिद्ध व्यवसायी शिवचरण बाबू डालमिया ने कहा जियो और जीने दो से प्राणबंध महावीर स्वामी के बताए हुए रास्ते का अनुसरण कर लिए होते, तो आज संपूर्ण विश्वमानव ही नहीं समस्त प्राणियों का भी कल्याण संभव होता। सम्मानित साहित्यकार राधा मोहन मिश्रा माधव ने कहा सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य व्रत के प्रणेता भगवान महावीर के संदेश आज के आधुनिक समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ने अपने अमूल और आध्यात्मिक विचारों से वहां उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन किया .
आचार्य ने स्पष्ट किया कि भगवान महावीर ने हमेशा बाहरी शत्रुओं से लड़ने के बजाय स्वयं की इंद्रियों और मां पर विजयपथ करने को ही मनुष्य की सच्ची विजय माना है उन्होंने उपस्थित जन समूह को यह विनम्र आग्रह किया कि वह सैनिक भौतिक सुखों की अंधी दौड़ से बाहर निकले और आत्म कल्याण तथा निस्वार्थ सेवा के मार्ग को अपनावे।प्रसिद्ध समाजसेवी विनय राजेश जैन ने कहा कि केवल महावीर स्वामी का जीवन मानवता का संदेश तो है हीं, बल्कि सत्य, अहिंसा,सेवा करुणा, दया के मार्ग पर चलने वाले उनके समस्त मुनियों ने भी महावीर स्वामी के सिद्धांत विचारों से समझौता नहीं किया। स्वाभिमान, धवल चरित्र, सादगी, कर्तव्यबोध और प्राणियों के कल्याण के लिए जो सेवा समर्पण का भाव है, मानवीय जीवन के इतिहास में एक मिसाल है । उनके जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए ।भारद्वाज ज्योतिष शिक्षा शोध संस्थान के निदेशक डॉक्टर ज्ञानेश भारद्वाज ने कहा कि आज जिस तरह से हमारे समाज में हिंसा, आतंक, व्यभिचार से मानवता एवं इंसानियत का निर्माण हुआ है नग्न तांडव हो रहा है वह समस्त प्राणियों के लिए मानवता के लिए खतरे की घंटी है। ऐसे में भगवान महावीर के दर्शन- विचारों की प्रासंगिकता पहले से ज्यादा अब है।शिवानी जैन, चिराग जैन संगीता जैन, रौनक जैन, साक्षी जैन, नमिता कुमारी, सुमन जैन, नमिता कुमारी, विमला देवी, डॉ दिनेश कुमार सिंह, डॉ रविंद्र कुमार, सिद्धार्थ कुमार, देवेंद्र पाठक, आचार्य सुनील पाठक, अमरनाथ पांडेय, अमरनाथ मिश्रा, राजीव लाल गुर्दा दीपक पाठक, राजेंद्र सिंह, दिलीप कुमार, शंभू गिरी, नीरज वर्मा, सुनीता देवी, चंद्रभूषण मिश्र, विश्वजीत चक्रवर्ती, रजनी चावला, प्रोफेसर सुनील कुमार मिश्रा, रंजीत पाठक, पवन मिश्रा मृदुला मिश्रा आनंद सिंह, मनीष कुमार मिश्रा, रामकिशोर पांडेय, सुनीता कुमारी, मुन्नी कुमारी, पिंटू कुमार, दिनेश कुमार, अर्चना कुमारी पूजा कुमारी, नेहा पाठक, अरुण ओझा शीतल चौबे पक कुमारी, अपर्णा मिश्रा, दिव्यांशु कुमार, हर्ष कुमार संतोष प्रसाद, रूबी कुमारी डॉक्टर शंभू कुमार, धर्मेंद्र कुमार, रामप्रवेश पाठक, प्रियांशु मिश्रा, नीलम कुमारी, कविता राऊत, पार्वती देवी, प्रोफेसर अशोक कुमार, मनीष कुमार, डिंपल कुमारी, रंजना पांडेय, बेबी देबी, अजय मिश्रा, सुनील कुमार, अभय सिंह का नाम शामिल है.
