अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को सिविल सर्जन की देखरेख में दी गयी थेरेपी
DHIRAJ.
वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने अभियान का किया शुभारंभ
गया।जिला में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया यानि खून की कमी की गंभीर स्थिति को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक नई कवायद शुरू की गयी है। इस कवायद में फेरिक कार्बोसीमाल्टोज इंजेक्शन (एफसीएम) थेरेपी को शामिल किया गया है। एफसीएम थेरेपी उन गर्भवती महिलाओं के लिए एक सुरक्षा कवच बनेगा जो खून की कमी की वजह से प्रसव के दौरान जोखिम में रहती हैं। वृहस्पतिवार को जिला सहित राज्य के सभी जिलों में फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज़ थेरेपी अभियान का राज्यस्तरीय शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे द्वारा वीडियो क्रॉफेंसिंग के माध्यम से किया गया है। जिला के प्रभावती अस्पताल में वीडियो क्रॉफेंसिंग के माध्यम से शुभारंभ इस अभियान के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस दौरान अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को एफसीएम थेरेपी भी दी गयी। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ राजराम प्रसाद तथा डीपीएम सहित अन्य वरीय स्वास्थ्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
सुरक्षित प्रसव कराने में होगी मदद:
सिविल सर्जन डॉ राजराम प्रसाद ने बताया कि एनीमिया ग्रसित सभी गर्भवती महिलाओं को यह थेरेपी देने के सभी जरूरी इंतज़ाम किये जाये। कहा कि जिला स्वास्थ्य संस्थान जैसे जिला अस्पताल प्रथम रेफरल इकाई का चयन कर बीस बेड की व्यवस्था की गयी है। इस दौरान 20 एनीमिया ग्रसित गर्भवतियों को एफसीएफ थेरेपी दिया गया। साथ ही आवश्यक दवाई भी मुहैया करायी गयी है। इस अभियान की मदद से गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की गंभीर स्थिति से उबार कर सुरक्षित प्रसव कराने में बड़ी मदद मिलेगी। डीपीएम नीलेश कुमार ने बताया कि एफसीएम थेरेपी मेडिकल नजरिए से महत्वपूर्ण थेरेपी है। यह एक सुरक्षित थेरेपी है जिसकी मदद से गर्भवती के शरीर में खून की कमी को पूरा किया जाता है। आयरन की गोलियों के सेवन के बाद में खून में कमी होने की स्थिति में इस थेरेपी को चिकित्सयी देखरेख में दिया जाता है। गर्भावस्था के 34 सप्ताह से अधिक हो जाने पर इस थेरेपी का चिकित्सीय परामर्श के साथ दिये जाना है।
एनीमिया की जिला व राज्य में स्थिति:
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे—5 की रिपोर्ट के मुताबिक जिला में 15 से 49 वर्ष आयुवर्ग की 64 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। हालांकि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे—4 में यह 68 प्रतिशत था। इसमें चार प्रतिशत सुधार देखा गया है लेकिन इसमें और अधिक सुधार लाने की आवश्यकता है। राज्य में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की स्थिति राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे पांच के आंकड़ों के अनुसार बिहार में लगभग 63 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं। जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 63.0 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत 52 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक है।
