आईआईएम बोधगया बना वैश्विक मंच: एआई के दौर में मार्केटिंग के भविष्य पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ICM 2.0

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-विशेषज्ञों ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस तरह उपभोक्ता व्यवहार और मार्केटिंग रणनीतियों को बदल रहा है।
विश्वनाथ आनंद
गया जी (बिहार)-आईआईएम बोधगया में 14–15 मार्च 2026 को इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन मार्केटिंग (ICM 2.0) का आयोजन किया गया, जिसमें दुनिया भर से आए विद्वानों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। “उपभोक्ता अनुभव और मार्केटिंग रणनीतियों में एआई-आधारित परिवर्तन” के विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा के उपभोक्ता अनुभव तथा मार्केटिंग रणनीतियों पर बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की गई। इस दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि मार्केटिंग अब पारंपरिक जनसंचार से आगे बढ़कर एआई और उन्नत डेटा विश्लेषण की मदद से अधिक व्यक्तिगत और पूर्वानुमान आधारित उपभोक्ता जुड़ाव की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।सम्मेलन के स्वागत भाषण में आईआईएम बोधगया की निदेशक और सम्मेलन संरक्षक प्रो. विनिता एस. सहाय ने संस्थान के उस दृष्टिकोण को साझा किया, जिसके तहत प्रभावशाली शोध को बढ़ावा दिया जा रहा है और छात्रों को तकनीक और डेटा-केंद्रित अर्थव्यवस्था के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान में शिक्षण, शोध और संस्थागत प्रक्रियाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने की पहल की जा रही है, ताकि भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य के लिए तैयार किया जा सके।

सम्मेलन में कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने मुख्य भाषण दिए। इनमें आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर आनंद के. जायसवाल, टेक्सास स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आदित्य गुप्ता, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर गीता मेनन, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (हैदराबाद) के प्रोफेसर मधु विश्वनाथन, आईआईएम कोझिकोड की प्रोफेसर शफाली गुप्ता और सनवे यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वेंग मार्क लिम शामिल रहे। इन वक्ताओं ने एआई आधारित मार्केटिंग, डिजिटल बाज़ारों के विकास, इंटेलिजेंट रिकमेंडर सिस्टम और व्यावसायिक निर्णय-प्रक्रिया में डेटा के बढ़ते महत्व जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि मशीन लर्निंग, प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स और डेटा इंटेलिजेंस जैसी तकनीकें कंपनियों को उपभोक्ताओं को बेहतर समझने और उन्हें व्यक्तिगत अनुभव देने में मदद कर रही हैं। साथ ही उन्होंने डेटा गोपनीयता, नैतिकता और तकनीक के जिम्मेदार उपयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी उपस्थित रहे। उन्होंने एआई के व्यापक सामाजिक प्रभावों पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि तकनीक के प्रति विश्वास बनाना, लोगों को केंद्र में रखकर बदलाव को अपनाना और निरंतर कौशल विकास को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है, ताकि समाज तेजी से हो रहे नवाचार के साथ कदम मिला सके। उन्होंने तकनीकी प्रगति को लोगों, पर्यावरण और विकास के साथ संतुलित रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

सम्मेलन को छह प्रमुख विषयों के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिनमें मार्केटिंग एनालिटिक्स, डिजिटल अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता व्यवहार, एआई आधारित संचार रणनीतियाँ, विभिन्न क्षेत्रों में एआई के उपयोग, स्थिरता और नैतिकता, तथा उभरती शोध पद्धतियाँ शामिल थीं।

ICM 2.0 को कुल 260 से अधिक शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से कठोर समीक्षा प्रक्रिया के बाद 205 शोध पत्र स्वीकार किए गए। इस सम्मेलन का संयोजन डॉ. पिनाज़ तिवारी, डॉ. अनुप ए. सोरेन और डॉ. चंदन प्रसाद ने किया, जिन्होंने कार्यक्रम के शैक्षणिक और आयोजन संबंधी समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। इस सम्मेलन में उद्योग, शिक्षाविदों और शोध समुदाय से जुड़े प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम बैंगलोर और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के विद्वान भी शामिल थे। दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में ऑफलाइन और ऑनलाइन सत्रों के माध्यम से 120 से अधिक शोध प्रस्तुतियाँ दी गईं।

मुख्य भाषणों, तकनीकी चर्चाओं और शोध प्रस्तुतियों के माध्यम से ICM 2.0 ने एक बार फिर यह साबित किया कि आईआईएम बोधगया मार्केटिंग, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में वैश्विक शैक्षणिक संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।