नन्हें रोजेदार शुफैला एवं फुरकान ने रखा 18वां रोज़ा
-परिवार और समाज के लिये मांगी अमन चैन क़ी दुआ .
विश्वनाथ आनंद
गया जी ( बिहार)-गयाजी जिला के वजीरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत जलालपुर गांव निवासी तथा प्राथमिक विद्यालय टोटही के प्रधान शिक्षक फिरदौस आलम के परिवार में उस समय खुशी का माहौल देखने को मिला, जब उनकी बेटी शुमैला फिरदौस और भतीजा मोहम्मद फुरकान आलम ने पवित्र रमज़ान माह का 18वां रोज़ा सफलतापूर्वक मुकम्मल किया। दोनों नन्हें रोजेदारों के हौसले और धार्मिक आस्था को देखकर परिवार के साथ-साथ पूरे गांव के लोग भी गर्व महसूस कर रहे हैं। बताया जाता है कि रमज़ान के पवित्र महीने में रोज़ा रखना इस्लाम धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें सुबह से लेकर सूर्यास्त तक बिना कुछ खाए-पिए अल्लाह की इबादत की जाती है। इतनी कम उम्र में शुमैला फिरदौस और मोहम्मद फुरकान आलम का रोज़ा रखना उनके अंदर की गहरी आस्था और धार्मिक संस्कारों को दर्शाता है।
परिवार के लोगों ने बताया कि दोनों बच्चे पूरे उत्साह और लगन के साथ रोज़ा रख रहे हैं। सहरी के समय समय पर उठकर सहरी करते हैं और दिनभर इबादत में भी हिस्सा लेते हैं। शाम को इफ्तार के समय पूरे परिवार के साथ मिलकर रोज़ा खोलते हैं। बच्चों के इस जज़्बे से परिवार के बड़े-बुजुर्ग भी काफी खुश हैं और उन्हें दुआएं दे रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि आज के समय में जब बच्चे मोबाइल और अन्य चीजों में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में इन नन्हें बच्चों का रोज़ा रखना और धर्म के प्रति समर्पण दिखाना समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। इससे अन्य बच्चों को भी अपने धर्म और संस्कारों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। परिवार और आसपास के लोगों ने दोनों बच्चों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और अच्छी सेहत की दुआ मांगी है। रमज़ान के इस पवित्र माह में इन नन्हें रोजेदारों का जज़्बा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग उन्हें खूब दुआएं दे रहे हैं।
