सूर्य नारायण हमें कर्म पथ पर निरंतर गतिशील होने की प्रेरणा देते हैं-डॉक्टर विवेकानंद मिश्र

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विश्वनाथ आनंद .
गया जी( बिहार)-गया जी जिला के स्थानीय डॉक्टर विवेकानंद पथ स्थित हरि अनंत सेवा धाम के प्रांगण में भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के तत्वावधान में सूर्य सप्तमी दिवस के अवसर पर सूर्य नारायण की विशेष पूजा अर्चना हवन आदि के पश्चात एक विचार संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए महासभा एवं मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विवेकानंद मिश्र ने कहा की सृष्टि की रचना के पश्चात घोर अंधकार से व्याप्त धरती पर जब संपूर्ण जीव त्राहिमाम कर रहे थे,तब सूर्य नारायण का प्रथमबार दर्शन इसी सूर्य सप्तमी, रथ सप्तमी, या अचला सप्तमी के नाम से ज्ञात तिथि को हुआ था। आज का यह पावन दिवस सूर्य उपासको खासकर सूर्यांश परिवारों के लिए महान पर्व है। जिसमें सूर्य नारायण का जन्मदिवस महोत्सव के रूप में भी मनाने की परंपरा है।डॉक्टर मिश्र ने आगे कहा सूर्य न केवल प्रकृति के नियंता हैं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था के भी मूल स्रोत हैं। आज हम सब मिलकर इनके द्वारा भूतल के समस्त प्राणियों पर बरसाए गए कृपा के लिए हृदय से वंदन करते हैं, कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं, क्यों की किसी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना “वसुधैव कुटुम्बकम” से प्राणवंत हमारी महान संस्कृति की मुख्य विशेषता है। खासकर सूर्यनारायण के प्रति जो प्राणीयों के सूसुप्त चेतना को जाग्रत कर कर्म पथपर निरंतर गतिशील होने की प्रेरणा देते हैं।

यही प्रत्यक्ष देव अंधकार को मिटाकर पृथ्वी पर प्रकाश का उपहार देते हैं। हमें यह समस्त जीवों के प्रति एकरूपता, करुणा, दया के साथ सेवा की ओर चलकर धर्म के प्रति पवित्रता तथा प्रकृति के संरक्षण के प्रति दायित्व बोध का संदेश देते हैं। धन्य हैं यह प्रत्यक्ष सूर्यनारायण देव आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ने कहा कि समस्त प्राणियों के कल्याण करने वाले सूर्य नारायण द्वादश आदित्य रूप में विविध उर्जाओं और चेतनाओं का प्रतीक हैं, जिसे वर्ष के बारह महीने के अधिपति माना गया है। प्राणियों के जीवन दाता हैं। यही कारण है कि सनातन धर्म की दृष्टि में प्रत्यक्ष देवता के रूप में सूर्य को साकार रूप में स्वीकार किया गया है। यह पर्व हमें तेजस्वी सोच, स्वस्थ शरीर और निर्मल मन के साथ जीवन पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है. वही डॉक्टर ज्ञानेश भारद्वाज ने कहा की सूर्य को नवग्रहों में प्रमुख स्थान प्राप्त है जो जीवन चक्र रितुओं और काल- गणना के रूप में पूजे जाते हैं।डॉ राम किशोर पाठक के आचार्यत्व में यजमान प्रियांशु मिश्रा ने संपूर्ण धार्मिक कार्यों को विधि विधान से सूर्यनारायण की विशेष पूजा अर्चना हवन यादि क्रिया संपन्न किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कृतज्ञता ज्ञापित किया प्रसाद ग्रहण किया उनमें प्रमुख रूप से पंडित निशिकांत मिश्रा आचार्य बालमुकुंद मिश्रा अजय मिश्रा बबलू अमरनाथ पांडे प्रोफेसर अशोक कुमार डॉक्टर गीता कुमारी डॉ रविंद्र कुमार संदीप मिश्रा रंजना पांडे दीपिका मिश्रा मनोज कुमार मिश्रा डॉक्टर अमरेश मिश्रा प्रोफेसर सुनील मिश्रा दीपक पाठक पवन मिश्रा रश्मि मिश्रा विभाश मिश्रा नीलम पाठक बिंदु देवी सुंदरता देवी सुप्रिया देवी अंबिका नीतू शांति देवी एसएन उपाध्याय शोभा ओझा नम्रता ओझा दिलीप कुमार शिवजी कुमार बाणासुर अमित गोस्वामी शंभू गिरी डॉ जितेंद्र कुमार मिश्रा दीपिका मिश्रा मनोज कुमार मिश्रा चंद्रभूषण मिश्रा पूनम सिन्हा सुगंधा पाठक अनूप पाठक धनंजय पाठक प्रिया देवी मनीष कुमार डिंपल कुमारी फुल कुमारी सुरेश मांझी मिट्ठू मांझी रूपा देवी गीता चंद्रवंशी मालती देवी बेबी देवी संध्या मिश्रा रवि कुमार मिश्रा दिव्यांशु मिश्रा आदि उल्लेखनीय थे।।