अंगिका साहित्य महोत्सव में सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार को ‘दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान’
विश्वनाथ आनंद .
पटना (बिहार )-विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर अंग प्रदेश की सांस्कृतिक धरती भागलपुर स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र में रविवार को अंगिका साहित्य महोत्सव सह दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन युग चेतना फाउंडेशन, अंग-जन-गण, अंग मदद फाउंडेशन तथा अंगिका महासभा फाउंडेशन के तत्वावधान में हुआ।समारोह में आधुनिक समकालीन कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में देशहित में उत्कृष्ट योगदान के लिए बिहार के विश्वविख्यात अंतरराष्ट्रीय रेत कलाकार मधुरेंद्र कुमार को अंगवस्त्र व स्मृति-चिन्ह प्रदान कर ‘दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान’ से सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि जिस प्रकार अंग प्रदेश के महादानी कर्ण ने अपने जीवन में दान और त्याग की परंपरा स्थापित की, उसी प्रकार सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने भी अपनी कला और जीवन को समाज व राष्ट्र के लिए समर्पित किया है। उन्होंने जाति-धर्म से ऊपर उठकर सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर कला का सृजन कर देश-विदेश में भारत की पहचान मजबूत की है।
उल्लेखनीय है कि अपनी बेमिसाल रेत कलाकृतियों के दम पर मधुरेंद्र कुमार 50 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत हो चुके हैं। वर्ष 2023 में उनका नाम ‘ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ बिहार’ पुस्तक में शामिल किया गया। वर्ष 2025 में लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड तथा एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में और वर्ष 2026 में यूनाइटेड नेशन (यूएन) बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी उनका नाम दर्ज हुआ है। इसके अतिरिक्त उन्हें नेपाल में भारत-नेपाल मैत्री अंतरराष्ट्रीय सम्मान, भूटान में बेस्ट सैंड स्कल्प्चर ऑफ द ईयर अवॉर्ड, रवि वर्मा राष्ट्रीय सम्मान, तिलका मांझी राष्ट्रीय सम्मान, डॉ. भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय सम्मान, भारत गौरव अवार्ड, बिहार गौरव अवार्ड, चंपारण गौरव अवार्ड, चंपारण रत्न तथा मगध रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है।
इस अवसर पर डॉ. डी.पी. सिंह, डॉ. शंभू दयाल खेतान, प्रो. डॉ. रतन कुमार मंडल, डॉ. अमरेंद्र, डॉ. सुधीर मंडल तथा वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत सहित अनेक बुद्धिजीवियों व गणमान्य लोगों ने सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार को बधाई देते हुए कहा कि मधुरेंद्र की उपलब्धियां न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं।समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार और अंगिका भाषा-संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।