लोदीपुर गांव आज भी विकास से वंचित- ई. हिमांशु शेखर

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विश्वनाथ आनंद .
गया( बिहार)-गयाजी जिले के मानपुर प्रखंड अंतर्गत गेरे पंचायत का लोदीपुर गांव कभी प्रकृति की गोद में बसा एक रमणीय गांव हुआ करता था। चारों ओर से पहाड़ों से घिरे इस गांव के पर्वतों से वर्षों तक पत्थर काटकर देशभर में भेजा गया. और उन्हीं पत्थरों से सड़कों का निर्माण हुआ, लेकिन विडंबना यह है कि लोदीपुर गांव की अपनी सड़क आज तक नहीं बन सकी।स्थानीय लोगों के अनुसार, एक समय गांव के चारों ओर कई पहाड़ थे, लेकिन अवैध एवं अंधाधुंध खनन के कारण अब केवल एक ही पहाड़ शेष बचा है। इस पहाड़ पर मंदिर स्थित होने के कारण इसे छोड़ा गया, जिसे ग्रामीण ‘ईश्वरीय संरक्षण’ मानते हैं। शेष पर्वत श्रृंखलाओं का दोहन विकास के नाम पर किया गया, जिससे न केवल प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा बल्कि गांव की पहचान भी समाप्त होती चली गई।विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वत प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। धरती की लगभग 27 प्रतिशत भूमि पर पर्वत फैले हुए हैं, जो आर्थिक, सामरिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

इसके बावजूद मानव अपने स्वार्थ और तथाकथित विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति का निरंतर दोहन कर रहा है, जिसका परिणाम भविष्य में विनाशकारी हो सकता है।ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के कई प्रतिनिधि विधानसभा में इस इलाके का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। गेरे गांव के अवधेश सिंह ने कई बार विधानसभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, वहीं वर्तमान में भाजपा के वीरेंद्र सिंह यहां के विधायक हैं। बावजूद इसके लोदीपुर गांव जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता से बाहर रहा है। आजादी के अमृत काल में भी यह गांव पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है।विडंबना यह भी है कि लोदीपुर गांव के कई लोग देश-विदेश में रहकर सफलता की ऊँचाइयों को छू रहे हैं, लेकिन उनका पैतृक गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु शेखर ने अपने लोदीपुर भ्रमण के दौरान पर्वतों की दुर्दशा और गांव की उपेक्षा पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने पर्वतों की पूजा कर उनके संरक्षण की परंपरा शुरू की थी, ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे। आज आवश्यकता है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए।उन्होंने जनप्रतिनिधियों से लोदीपुर गांव के समुचित विकास, विशेषकर पक्की सड़क निर्माण और पर्यावरण संरक्षण की ठोस पहल करने की मांग की है।