वैदिक वांग्मय में मनोचिकित्सा’ विषय पर मगध यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभाग की आचार्य डॉ ममता मेहरा ने दिया व्याख्यान

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DHIRAJ.

बोधगया। बीते 16-18 मार्च को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वैदिक विज्ञान केंद्र में त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का विषय वैदिक विज्ञान के विविध स्वरूप रहा, जिसमें देश-विदेश से 200 से अधिक संस्कृत विद्वानों का जमावड़ा लगा। पहले सत्र का उद्घाटन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अजीत चतुर्वेदी के द्वारा किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय संगठन का विषय वैदिक विज्ञान के विविध स्वरूप रहा, जिसमें देश-विदेश से 200 से अधिक अधिक संस्कृत विद्वानों का महाकुंभ लगा।इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मगध विश्वविद्यालय बोधगया के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग की सहायक आचार्य डॉ ममता मेहरा को इस ज्ञान यज्ञ में आहुति देने के लिए वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था, जहां उन्होंने वैदिक वांग्मय में मनोचिकित्सा विषय पर अपना व्याख्यान दिया और वेदों में उपलब्ध मनोविज्ञान के तत्वों की जानकारी देते हुए अवसाद, दुःस्वप्न,अनिद्रा, भय, अकेलापन आदि विभिन्न प्रकार के मानसिक रोगों के उपचार की वैदिक विधि को प्रकाशित करने का प्रयास किया। संगोष्ठी में उपस्थित काशी के महनीय विद्वानों द्वारा डॉ मेहरा के वक्तव्य की प्रशंसा की गई और उन्हें अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं माल्यार्पण द्वारा सम्मानित किया गया।

विभिन्न सत्रों में श्री लाल बहादुर शास्त्री केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मुरली मनोहर पाठक, वेदशास्त्र के मूर्धन्य विद्वान् प्रो हृदय रंजन शर्मा, प्रो श्रीकिशोर मिश्र, वैदिक विज्ञान केंद्र के पूर्व समन्वयक प्रो उपेंद्र कुमार त्रिपाठी, प्रो पतंजलि मिश्र, संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो सदाशिव कुमार द्विवेदी, सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, गुजरात के पूर्व कुलपति प्रो गोपबंधु मिश्र, दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रो रंजन त्रिपाठी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्रो रामनाथ झा, डॉ कृष्ण मोहन पांडेय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डॉ निरुपमा त्रिपाठी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से डॉ सारिका वार्ष्णेय, ज्योतिष विभाग के प्रो सुभाष पांडेय, वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ विनय कुमार पांडे आदि अनेकानेक विशिष्ट विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बताते चलें कि डॉ ममता मेहरा ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेकर मगध विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है।