सनातन धर्म को कमजोर करने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा- त्रिविक्रम नारायण सिंह.

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-औरंगाबाद जिला के स्थानीय भाजपा विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने मग विद्वंत परिषद देव धाम के पुस्तक विमोचन के दौरान कहीं.
विश्वनाथ आनंद
औरंगाबाद( बिहार)- बिहार के औरंगाबाद जिला मुख्यालय के सूर्य मंदिर सभा कक्ष में मग विद्वत परिषद देवधाम औरंगाबाद का बैठक आहूत किया गया. जिसका विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि भाजपा के स्थानीय विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह सहित संस्था के गण्यमान लोगों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. दीप प्रज्वलित करने के उपरांत स्थानीय भाजपा विधायक को अंग वस्त्र एवं भगवान सूर्य भास्कर का फोटो देकर सम्मानित किया गया. स्थानीय विधायक ने मग विद्वत परिषद देवधाम औरंगाबाद की पुस्तक विमोचन किया. उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए भाजपा के स्थानीय विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने कहा कि सनातन धर्म को कमजोर करने वाले लोगों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि प्राचीन काल से ही सनातन को कमजोर करने का प्रयास किया गया है. लेकिन सनातन धर्म के समर्थकों द्वारा इसका पुरजोर विरोध करते हुए मुंह तोड़ जवाब दिया गया है. उन्होंने सनातन धर्म के मानने वालों से अपील करते हुए कहा है कि सनातन धर्म ,तभी सुरक्षित होगा जब सनातन के प्रति एकजुटता का परिचय देने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अयोध्या का श्री राम मंदिर निर्माण का मामला हो या फिर सोमनाथ मंदिर का तथा कई ऐसे कई मंदिर हैं, जिसका सनातन विरोधियों ने विरोध किया. लेकिन सत्य की विजय होती है. उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार ने देश में रामराज कायम करना चाहती है. लेकिन सनातन विरोधियों को रास नहीं आ रहा है. उन्होंने कहा कि सनातन के विरोध करने वालों को मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा. ऐसे तो उन्होंने सनातन धर्म का समर्थन करते हुए विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला. इसी तरह कई गण्यमान लोगों ने भी सनातन धर्म पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुए मग विद्वत परिषद देव धाम औरंगाबाद संस्था को सशक्त बनाने को लेकर अपना -अपना राय व्यक्त किया. संस्था के संरक्षक गुप्तेश्वर पाठक ने कहा कि माघ मास में शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि को अचला सप्तमी के रूप में जाना जाता है। इसे सूर्य सप्तमी, रथ आरोग्य सप्तमी, सूर्यरथ सप्तमी, पुत्र सप्तमी आदि नामों से भी जाना जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि मान्यता है कि इसी दिन से सूर्यदेव ने अपने प्रकाश से जगत को प्रकाशित किया। इसी दिन सूर्यदेव प्रकट हुए थे। इस दिन को सूर्यदेव के जन्‍मदिन के रूप में मनाया जाता है।सूर्यदेव को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। उन्होंने कहा कि यदि अचला सप्तमी रविवार के दिन हो तो इसे भानु सप्तमी कहा जाता है।आज के दिन नमक का त्याग किया जाता है।माघ मास की सप्तमी को जो व्यक्ति सूर्य की पूजा करके एक समय मीठा भोजन अथवा फलाहार करता है, उसे पूरे साल सूर्य की पूजा करने का पुण्य एक ही बार में प्राप्त हो जाता है। इस व्रत के महत्व के विषय में भविष्य पुराण में कहा गया है कि यह व्रत सौभाग्य, रूप और संतान सुख प्रदान करने वाला है।इस दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व नदी अथवा जलाशय में स्नान करके सूर्य को दीप दान करना उत्तम फलदायी माना गया है।अचला सप्तमी के दिन सूर्यांश शाकद्वीपीय ब्राह्मण देव सूर्य मंदिर औरंगाबाद ,मानगो सूर्य मंदिर जमशेदपुर, सूर्य मंदिर, मोढ़ेरा, अहमदाबाद,मार्तंड सूर्य मंदिर ,अनंतनाग,बेलाउर सूर्य मंदिर, भोजपुर,झालरापाटन सूर्य मंदिर,मार्तंड मंदिर, जम्मू, औंगारी सूर्य मंदिर,नालंदा,उन्नाव सूर्य मंदिर, रनकपुर सूर्य मंदिर, राजस्थान,सूर्य मंदिर रांची एवं अन्य सूर्य मंदिरों में सूर्यदेव की विशेष पूजा-अर्चना श्रद्धालुओं द्वारा किया जाता है. उन्होंने कहा कि जब भगवान श्री कृष्ण के पुत्र को कुष्ठ हो गया था, तब भगवान ने शाकद्वीप से अट्ठारह दिव्य सूर्यांश ब्राह्मणों को सपरिवार द्वारिका लाया ।उन्होंने साम्ब की चिकित्सा की। तत्पश्चात वे ब्राह्मण मगध (बिहार) आ गए। वह संस्कृत के प्रकाण्ड ज्ञानी थे. तथा चिकित्सक भी थे। आज उन्हीं अट्ठारह परिवारों के वंशज को शाकद्वीपीय ब्राह्मण के रूप में है. कार्यक्रम का संचालन धनंजय जयपुरी ने किया. वही कार्यक्रम की अध्यक्षता रविंद्र पांडेय एवं गुप्तेश्वर पाठक ने संयुक्त रूप से की. कार्यक्रम के दौरान उपस्थित होने वालों में मदनपुर प्रखंड अध्यक्ष मग विद्वंत परिषद देवधाम औरंगाबाद के नवल किशोर पांडेय, एवं मग विद्वंत परिषद देवधाम मदनपुर के उपाध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय सहित अन्य लोगों का नाम शामिल है.