गाल की हड्डी का ट्यूमर हटाकर 3D इम्प्लांट से चेहरे को किया ठीक

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CORRESPONDENT.

पटना, मार्च 30, 2026: नई दिल्ली स्थित बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने चेहरे की हड्डी में पाए जाने वाले एक अत्यंत दुर्लभ ट्यूमर से पीड़ित 58-वर्षीय मरीज का सफलतापूर्वक इलाज किया। पटना के मूल निवासी और वर्तमान में दिल्ली में रह रहे श्री ज्ञानेश्वर प्रसाद सिंह पिछले लगभग एक साल से अपने गाल की बाईं ओर धीरे-धीरे बढ़ रही बिना दर्द की सूजन से जूझ रहे थे। शुरुआत में यह समस्या उनके खाने, बोलने या देखने की क्षमता को प्रभावित नहीं कर रही थी, लेकिन समय के साथ चेहरे की बनावट में असमानता स्पष्ट होने लगी, जिसके बाद उनके परिवार ने विशेषज्ञ इलाज का निर्णय लिया।चेहरे में आए बदलाव को लेकर चिंतित परिवार उन्हें बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिट ट्यूमर आया, जहां उनकी जांच बीएलके सेंटर फॉर प्लास्टिक सर्जरी के वाइस चेयरमैन एवं हेड – डॉ. लोकेश कुमार और उनकी टीम द्वारा की गई। विस्तृत जांच और टेस्ट के बाद यह सामने आया कि मरीज को बाएं गाल की हड्डी (जाइगोमा) में इंट्राऑसियस हेमांजियोमा नाम का एक दुर्लभ और बेनाइन ट्यूमर है। इस तरह के ट्यूमर सभी बोन ट्यूमर के 1% से भी कम मामलों में पाए जाते हैं और चेहरे की हड्डियों, विशेष रूप से गाल की हड्डी में इनका होना और भी दुर्लभ है। ऐसे मामलों में सटीक डायग्नोसिस, मल्टी-डिसिप्लिनरी प्लानिंग और हाई प्रिसिशन सर्जरी की आवश्यकता होती है।

मामले पर जानकारी देते हुए बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के बीएलके सेंटर फॉर प्लास्टिक सर्जरी के वाइस चेयरमैन एवं हेड – डॉ. लोकेश कुमार, ने कहा, “यह जाइगोमैटिक बोन में इंट्राऑसियस हेमांजियोमा का बेहद दुर्लभ मामला था, जो क्लिनिकल प्रैक्टिस में बहुत कम देखने को मिलता है। हालांकि यह ट्यूमर बेनाइन था, लेकिन इसकी लोकेशन आंखों और चेहरे की नसों के बेहद करीब होने के कारण सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी, जहां छोटी सी गलती भी विजन या चेहरे की बनावट को प्रभावित कर सकती थी। हमने एडवांस इमेजिंग और 3D रिकंस्ट्रक्शन तकनीक की मदद से सर्जरी की बारीकी से योजना बनाई, जिससे ट्यूमर को पूरी तरह हटाने के साथ महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखा जा सके। पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट के जरिए उसी समय रिकंस्ट्रक्शन कर हमने फंक्शन और कॉस्मेटिक दोनों परिणामों को बेहतर बनाया।”सर्जरी के दौरान बाएं गाल की हड्डी से ट्यूमर को पूरी तरह हटा दिया गया। चेहरे की संरचना को दोबारा सामान्य बनाने के लिए सर्जिकल टीम ने कस्टम-डिज़ाइन किया गया 3D प्लान्ड PEEK (पॉलीईथर ईथर कीटोन) इम्प्लांट इस्तेमाल किया, जिसे टाइटेनियम प्लेट्स और स्क्रू की मदद से सुरक्षित रूप से फिक्स किया गया। इसके अलावा, आंख के हिस्से को सपोर्ट देने के लिए लेटरल ऑर्बिटल वॉल के साथ टाइटेनियम मेष भी लगाया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान आंख और आसपास की नसों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे मरीज की दृष्टि और आंखों की मूवमेंट पूरी तरह सामान्य बनी रही।

डॉ. लोकेश, ने आगे बताया, “सर्जरी और पोस्ट-ऑपरेटिव पीरियड पूरी तरह स्मूथ रहा और कोई कॉम्प्लीकेशन्स सामने नहीं आई। मरीज ने तेजी से रिकवरी दिखाई, चेहरे की समरूपता और आंखों का फंक्शन पूरी तरह स्थिर रहा। सर्जरी के तीन दिन के भीतर ही मरीज को स्थिर स्थिति में आवश्यक दवाइयों और फॉलो-अप सलाह के साथ डिस्चार्ज कर दिया गया।”यह केस भारत में एडवांस रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की बढ़ती क्षमताओं का एक मजबूत उदाहरण है। हाई-रिजोल्यूशन इमेजिंग, 3D सर्जिकल प्लानिंग और पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से अब डॉक्टर सबसे कॉम्प्लेक्स और दुर्लभ बीमारियों का भी सफलतापूर्वक इलाज कर पा रहे हैं, जिससे मरीजों को बेहतर फंक्शनल और कॉस्मेटिक परिणाम मिल रहे हैं।