बिहार के अनुदानित सम्बध्द शिक्षण संस्थानों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्माचारियों का विधान मंडल के समक्ष वेतनमान, पेंशन हेतु सामुहिक उपवास

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विश्वनाथ आनंद .
गया जी (बिहार)-पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज बिहार राज्य के 225 परीक्षाफल आधारित अनुदानित सम्बध्द डिग्री कॉलेज के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी की चिरलंबित समस्याओं के समाधान हेतु विधानमंडल के समक्ष सामुहिक उपवास रखते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने का काम किया। उपवास कार्यक्रम की अध्यक्षता महासंघ के अध्यक्ष डॉ शंभूनाथ प्रसाद सिन्हा ने किया तथा संचालन प्रवक्ता प्रो अरुण गौतम ने किया।उपवास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम में मगध विश्वविधालय के दर्जनों डिग्री कॉलेज के सैकड़ों शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के साथ शामिल बिहार प्रदेश कॉंग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता सह महाबोधि कॉलेज बेलागंज के रसायन शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो विजय कुमार मिट्ठू ने कहा कि बिहार राज्य के अनुदानित संबद्ध डिग्री कालेजों में कार्यरत लगभग 25 हज़ार शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों को परीक्षाफल आधारित लेट लतीफ अनुदान के बदले नियत वेतन एवं पेंशन भुगतान जिसे माननीय उच्च न्यायालय के डबल बेंच का आदेश एवं बिहार विधान परिषद की शिक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में राज्य के सभी कोटि के सम्बध्द शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों एव शिक्षकेतर कर्मचारियों के देय परीक्षाफल आधारित वेतन अनुदान की व्यवस्था समाप्त कर सभी को नियमित वेतन एवं पेंशन भुगतान हेतु नीतिगत निर्णय लेने की सरकार से मांग दोहराया।

उपवास में महासंघ के प्रोफेसर राजीव रंजन, डाक्टर अनिल कुमार सिन्हा, प्रो मदन शर्मा, प्रो राजीव कुमार, निशांत कुमार मुन्ना, विनोद कुमार, आदि ने लेट लतीफ अनुदान पर कहा कि शैक्षणिक सत्र 2015_ 2018 से अब तक आठ शैक्षणिक सत्रों का बकाया अनुदान राशि एकमुश्त भुगतान करने की गुहार राज्य सरकार से लगायी।
इस मांगों के अतिरिक्त 2008 के संकल्प का अनुपालन करते हुए परीक्षा परिणाम आधारित वेतन भुगतान की राशि स्नातक खंड हेतु एक करोड़ पच्चास लाख रुपया और इन्टर खंड हेतु पच्चास लाख रुपये की अधिसीमा – बंधेज को समाप्त किया जाये।नेताओं ने मगध विश्विद्यालय द्वारा कॉपीयो की जांच में महीनों बाद शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों को पारिश्रमिक भुगतान में देरी एवं राशि में कटौती की परम्परा को अविलंब समाप्त कर कॉपी मूल्यांकन के पारिश्रमिक में बिना कोई कटौती किए एक सप्ताह के अंदर भुगतान करने की मांग दोहराई गई।