ज्ञान कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की सरकारी एवं गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों में किया गया पूजा अर्चना

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विश्वनाथ आनंद .
गया जी (बिहार )- ज्ञान कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना सरकारी एवं गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों में धूमधाम से किया गया. शरद ऋतु की विदाई के साथ माघ शुक्ल पंचमी जहाँ एक ओर ऋतुराज वसंत के आगमन का सूचक है .वहीं दूसरी ओर संगीत व विद्या की देवी वीणावादिनी माँ सरस्वती के अवतरण का दिन भी है।बसन्त पंचमी के पर्व से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है। शांत, ठंडी, मंद वायु, कटु शीत का स्थान ले लेती है तथा सबको नवप्राण व उत्साह से स्पर्श करती है।महाकवि कालिदास ने ऋतुसंहार नामक काव्य में इसे सर्वप्रिये चारुतर वसंते कहकर अलंकृत किया है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने ऋतूनां कुसुमाकराः अर्थात मैं ऋतुओं में वसंत हूँ, कहकर वसंत को अपना स्वरुप बताया है।

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इस संबंध में कुमारी सुधा आनंद ने मीडिया से खास बातचीत के दौरान कहा कि माँ सरस्वती शांति का प्रतीक हैं! देवी के चार हाथ मन, बुद्धि, सतर्कता और अहंकार का प्रतीक हैं।वैसे तो सभी को, परंतु विशेष रूप से विद्यार्थियों को सरस्वती माँ का पूजन अवश्य करना चाहिए क्योकि ज्ञान तो उन्हीं की कृपा से प्राप्त होगा. पढ़ाई में सफलता प्राप्त करने के लिए सरस्वती माँ का आशीर्वाद परम आवश्यक है।सुख एवं समृद्धि का बसंत आप सभी के जीवन में सदैव बना रहे। विद्या, बुद्धि और विवेक की देवी माँ सरस्वती आप सभी के जीवन को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करें । उन्होंने बसंत पंचमी के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दिया है.