भारत के निर्माता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की हिंदू संस्कृति ,राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रधर्म में उनकी अगाध आस्था थी- राकेश कुमार.

WhatsApp Image 2025-12-26 at 4.55.04 PM

विश्वनाथ आनंद .
औरंगाबाद( बिहार )-भारत के विचारक, चिंतक, दार्शनिक और दलित हितों के सबसे बड़े संपोषक व संरक्षक आधुनिक भारत के निर्माता बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर का अपने जीवन काल के अंतिम समय में हिन्दू धर्म से मोह भंग हो गया था किन्तु हिन्दू संस्कृति, राष्ट्रीयता और राष्ट्र धर्म में उनकी अगाध आस्था थी। उक्त बातें सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहे. उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर का धर्म परिवर्तन का निर्णय कोई त्वरित नहीं था ,बल्कि जीवन काल के दीर्घकालिक अनुभवों पर आधारित था। इसके बावजूद भी उन्होंने न तो मुसलमान बनना स्वीकार किया, न ही ईसाई धर्म को स्वीकार किया, बल्कि धर्म परिवर्तन के समय उन्होंने लंबी छलांग की जगह ऊंची छलांग लगाई और हिन्दू संस्कृति के संपोषक बौध धर्म को स्वीकार किया।बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर का कहना था कि इस्लाम स्वीकार कर लेने से दलित को नबाव नहीं बना दिया जाएगा और न ही ‘नबावी और शेखी बघारने की हैसियत’ उन्हें प्राप्त हो जाएगी। उल्टे दलितों के इस्लाम स्वीकार कर लेने से देश में जनांकीकि में घोर परिवर्तन हो जाएगा, जो राष्ट्र की एकता, अखंडता और बहुलवादी सनातन संस्कृति के लिए चुनौती और खतरे दोनों के रूप में भविष्य में स्थापित होंगे।

उनका यह भी कहना था कि दलितों द्वारा ईसाई धर्म स्वीकार कर लेने से भी उन्हें न तो पोप बना दिया जाएगा और न ही समाज में पोप के समकक्ष वाली हैसियत प्रदान कर दी जाएगी। समाज के विषम परिस्थितियों में ईसाई धर्म अपनाकर भी वे समाज के नीचले पायदान पर ही बने रहेंगे। इसके अलावा ईसाई धर्म अपनाकर दलित समाज राष्ट्र, राष्ट्र धर्म, राष्ट्रीयता, हिन्दूवादी व सनातनी बहुलवादी संस्कृति से विमुख हो जाएगा।
इतिहास गवाह है कि आज के लगभग 1500-1700 साल पहले राजस्थान समेत उत्तर पश्चिम भारत से जाति संरचना में ‘डोम जाति’ के लोगों का प्रवासन बेहतर जीवन और उच्च सामाजिक स्थिति प्राप्त करने के लिए यूरोप समेत पाश्चात्य जगत के देशों में हुआ था जिन्हें आज ‘जिप्सी’ के नाम से जाना जाता है, लेकिन आज भी वे समाज के मुख्य धारा से ‘बहिष्कृत’ हैं।
कल औरंगाबाद जिले के सदर प्रखंड के रायपुरा गाँव के पास जीवन परिवर्तन और जीवन में परिवर्तन के लिए झांसा देकर बड़े पैमाने पर दलित परिवार और खासकर महिलाओं को हिन्दू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तन हेतु लाचार और बेवश करने करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ। बड़े पैमाने पर महिलाओं को कष्ट से मुक्ति की छद्मता दिखाकर ईसाई धर्म स्वीकार करने के लिए ब्रेन वाश यानी ‘मानसिक जोंक’ का उपयोग कर उन्हें लाचार और बेवश किया गया। इसका खुलासा जिला मुखिया संघ के अध्यक्ष सुजीत कुमार सिंह ने किया और धर्म परिवर्तन के गोरखधंधे में कांग्रेस के पूर्व विधायक माननीय आनंद शंकर सिंह के शामिल होने का आरोप बजाप्ता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगाया।दलितों के एक नेता जोगेन्द्र नाथ मंडल थे। पश्चिम बंगाल से थे और पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में पहले विधि मंत्री भी थे। वे दलितों की बड़ी आबादी के साथ पाकिस्तान चले गये थे किन्तु जीवन काल में ही दलितों पर मुसलमान बनने और जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तित होने के लिए ढ़ाया गया कहर ने उन्हें जीवन काल में ही विचलित कर दिया और इस्लाम प्रेम से मोहभंग कर दिया था।