हिन्दी समाज को बदलने होंगे अपने इतिहास के पुराने पैरामीटर : डॉ. अंजनी श्रीवास्तव

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DHIRAJ.

बोधगया।मगध विश्वविद्यालय के हिंदी एवं मगही विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन “भक्ति आंदोलन की सांस्कृतिक भूमिका” विषय पर किया गया है। कार्यक्रम का आयोजन प्रेमचंद सभागार, हिंदी भवन में हुआ, जिसमें शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही है।
इस संगोष्ठी की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद कुमार सिंह ने की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के हिंदी विभाग के सह आचार्य डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव उपस्थित रहे हैं।विषय प्रवेश हिन्दी विभाग, जगजीवन कॉलेज की डॉ. संगीता कुमारी ने करते हुए भक्ति की परिभाषा से अपने वक्तव्य में डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि भक्ति आंदोलन उस समय की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों की उपज थी जिसने भारतीय समाज में व्यापक सांस्कृतिक चेतना का संचार किया है। उन्होंने बताया कि वस्तुतः भारत में वैदिक काल से अब तक जागरण कई लहरें आईं जिनमें एक महत्वपूर्ण लहर भक्ति आंदोलन की भी थी।

मिश्र बंधुओं, एच. वेल्स, डेविड लॉरेंजन, रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामविलास शर्मा, मुक्तिबोध, नामवर सिंह आदि विद्वानों के हवाले से अंजनी जी ने विस्तृत रूप में भक्ति आंदोलन की सांस्कृतिक भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि संत परंपरा के निर्गुण धारा में इस्लाम एवं ईसाई प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि इस परंपरा का मूल्यांकन वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करना आवश्यक है। यह जानना जरूरी है कि भक्तों और संतों की जरूरत सत्ता को उस समय भी थी, आज भी है।
स्पष्ट किया कि जायसी और रज्जब जैसे उदार सूफी और निर्गुण भक्तों की जमात अमीर खुसरो और रहीम से बिल्कुल अलग है क्योंकि धार्मिक तत्व निजामुद्दीन औलिया तथा अन्य प्रचारकों के कारण समाज में अलग प्रभाव डालते रहे हैं। इसलिए हिन्दी समाज को अपने तय पैरामीटर बदलने चाहिए जिससे रटे रटाए साहित्य के इतिहास को निरपेक्ष ढंग से देखा जा सके। भक्तिकाल की परंपरा के खत्म होने और सवर्ण अवर्ण विभाजन संबंधी अवधारणाओं पर उन्होंने क्रमशः रामचंद्र शुक्ल और मुक्तिबोध से अपनी असहमति प्रकट की है।
इस अवसर पर पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. ब्रजेश कुमार राय, सहायक प्राध्यापक अनुज कुमार तरुण, डॉ. परम प्रकाश राय, मगही विभाग की डॉ. किरण कुमारी तथा हिन्दी विभाग, जगजीवन कॉलेज से डॉ. प्रदीप कुमार, जंतु विज्ञान विभाग से डॉ. रवि सहित अनेक शिक्षकों और संजना, शुभम, गोपेश, अभिषेक, सोनाली आदि विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही है। कार्यक्रम का संचालन सुशीला कुमारी द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राकेश कुमार रंजन ने प्रस्तुत किया है।