विश्व शांति सम्मेलन का भव्य उद्घाटन केन्द्रीय मंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किए गए
DHIRAJ.
शांति तब कायम रह सकती है जब वह भूखा न हो। भूखे इंसान को शांति नहीं चाहिए सबसे पहले उनका पेट भरना चाहिए।- जीतन राम मांझी
गया जी।विश्व कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी, ज़िला परिषद के उपाध्यक्ष शीतल यादव, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार एवं पीस एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. एसएन सिंह, विष्णुपद मंदिर प्रबंधक कमिटी के अमरनाथ धोकड़ी, चेम्बर्स आफ कोमर्स के अध्यक्ष प्रमोद भदानी के साथ साथ सभी धर्मों के उपस्थित धर्मगुरुओं ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया है।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी की उपस्थिति में सनातन सर्वधर्म संसद के अध्यक्ष स्वामी सुशील गोस्वामी महाराज व पूर्णदेव महाराज, इस्लामिक स्कॉलर ब्रदर यूसुफ, सिख स्कॉलर एलायंस ऑफ सिख ऑर्गेनाइजेशन के परमपाल सिंह साबरा, सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी पूर्वी भारत के अध्यक्ष सूरज सिंह नलवा, वहीं ईसाई स्कॉलर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पीस एंड जस्टिस के फादर एमडी थॉमस शामिल रहेंगे। बौद्ध धर्म से बीटीएमसी के धर्मेंद्र भंते ने कार्यक्रम को संबोधित किया है।
सनातन सर्वधर्म संसद के अध्यक्ष स्वामी सुशील गोस्वामी महाराज ने ईरान के सर्वोच्च धर्मगुरू अयातुल्लाह अली खामनेई की हत्या की निंदा की। उन्होंने कहा कि विश्व में युद्ध की नहीं बुद्ध की ज़रूरत है। विश्व शांति के लिए पीस एसोसिएशन ऑफ इंडिया के इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज में शांति कायम करने की उल्लेखनीय कोशिश है।
सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी पूर्वी भारत के अध्यक्ष सूरज सिंह नलवा ने कहा कि धर्म हमेशा अधर्म का नाश करने के लिए होता है। आज हमें ज़रूरत है कि समाज में हो रहे कुकृत्य के खिलाफ उठ खड़ा होना चाहिए। समाज में हिंसा, बलात्कार, दूसरे धर्म के लिए नफ़रत जैसे राक्षस सिर उठाये हुए है।
इसके बाद सनातन धर्म, इस्लाम धर्म, सिक्ख धर्म, बौद्ध धर्म, के बच्चों के ने*
केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने कहा शांति तब कायम रह सकती है जब वह भूखा न हो। भूखे इंसान को शांति नहीं चाहिए सबसे पहले उनका पेट भरना चाहिए। अगर उसका पेट भरा रहेगा तो शरीर शांत रहेगा और जब शरीर शांत रहेगा तो मन भी शांत रहेगा। शिक्षा व्यवस्था पर कहा कि आजकल की शिक्षा सिर्फ पुस्तकीय शिक्षा होकर रह गई है। इसमें नैतिक शिक्षा का अभाव है। इसी कारण विश्व भर में बुराई और नफरत फैल रही है। अगर नैतिक शिक्षा हमारे पाठ्यक्रम में शामिल हो जाएगा तो हो सकता है कि समाज में फैली अशांति में कमी आए।
इस्लामिक स्कॉलर ब्रदर यूसुफ ने कहा कि इस्लाम हमेशा ही शांति और सद्भाव का पैगाम देता है। इस्लाम में कहा गया है कि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की हत्या करता है चाहे वह किसी धर्म या जाति से संबंध रखता हो, वह इस्लाम का हिस्सा नहीं है। हम सबको मिलजुल कर अमन के साथ रहना चाहिए। हमें एक दूसरे की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए।
जैन धर्म के स्कॉलर योगभूषण जी महाराज ने कहा कि सभी जीव एक दूसरे का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने कहा था – अहिंसा परमो धर्म: का पाठ दिया है। जैसा जीवन में स्वयं के लिए चाहते हो वैसा ही जीवन दूसरों को भी जीने का अधिकार है की जीवन में भी शांति और प्रेम बनाए रखें।मंच संचालन डॉ. धनंजय धीरज ने किया है।
