ई. हिमांशु शेखर ने बौद्ध महोत्सव में ग्रामीण बौद्ध स्थलों को शामिल करने की जिला प्रशासन से किया मांग

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विश्वनाथ आनंद
टिकारी( बिहार)- बौद्ध महोत्सव, बोधगया में गयाजी जिले के ग्रामीण बौद्ध स्थलों को सम्मिलित किए जाने की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु शेखर ने जिला पदाधिकारी गयाजी, पर्यटन सचिव एवं माननीय मुख्यमंत्री को आवेदन देकर जिले की समृद्ध बौद्ध विरासत को समग्र रूप से सामने लाने की अपील की है।
आवेदन में कहा गया है कि गयाजी जिला भगवान गौतम बुद्ध की तपोभूमि रहा है तथा इसके ग्रामीण अंचलों में अनेक ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के बौद्ध स्थल मौजूद हैं। बौद्ध महोत्सव का उद्देश्य केवल बोधगया तक सीमित न रहकर जिले भर की बौद्ध विरासत को संरक्षण, विकास और वैश्विक पहचान दिलाना होना चाहिए।

हिमांशु शेखर ने उल्लेख किया कि वर्ष 2024 में जिला प्रशासन द्वारा “पंचायत दर्शन” कार्यक्रम के तहत ग्रामीण बौद्ध स्थलों को जोड़ने का प्रयास किया गया था, किंतु पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण यह योजना अपेक्षित सफलता नहीं पा सकी और वर्ष 2025 में इसे स्थगित कर दिया गया।आवेदन में सांसद आदर्श ग्राम केसपा का विशेष उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह क्षेत्र सनातन एवं बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। मान्यताओं के अनुसार भगवान बुद्ध के प्रधान शिष्य महाकश्यप का आश्रम केसपा में स्थित था। यहाँ माँ तारा देवी मंदिर,बुद्ध पदचिन्ह, आदमकद बुद्ध प्रतिमा एवं कमल पुष्प प्रतीक जैसे महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं। 1992 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने माँ तारा देवी मंदिर में पूजा किए थे।उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि स्वयंसेवी संस्थाओं, बौद्ध धर्म प्रचारकों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए केसपा सहित जिले के सभी ग्रामीण बौद्ध स्थलों को बौद्ध महोत्सव, बोधगया से जोड़ा जाए, ताकि बौद्ध विरासत का संतुलित एवं समग्र विकास हो सके।हिमांशु शेखर ने कहा है कि 22 जनवरी से 24 जनवरी तक बौद्ध महोत्सव का कार्यक्रम निर्धारित है। 23 जनवरी को सरस्वती पूजा होने की वजह से बौद्ध महोत्सव में विद्यार्थी शामिल नहीं हों सकेंगे। बौद्ध महोत्सव का आयोजन गणतंत्र दिवस के उपरांत किया जाना चाहिए था।