बिहार के अगले कमान संभालने वाले के सामने बड़ी होगी चुनौती- ई. हिमांशु शेखर
— राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री को लेकर कई तरह के लगाए जा रहे हैं क्यास.
-जनता दल यूनाइटेड के कार्यकर्ताओं में रोष .
विश्वनाथ आनंद .
पटना( बिहार )-बिहार की राजनीति में लगभग दो दशकों तक केंद्रीय भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर अपने राजनीतिक जीवन की आखिरी पारी की शुरुआत कर दी है। यह बिहार की राजनीति में एक युग परिवर्तन का संकेत है। लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने राज्य की राजनीति, प्रशासन और विकास को नई दिशा प्रदान किया। वही जनता दल यूनाइटेड के कार्यकर्ताओं ने राज्यसभा जाने की चर्चा को लेकर रोष प्रकट करते हुए विरोध जताया. तथा बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर राजनीति की गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं जारी है. आखिर कौन बनेंगे बिहार का मुख्यमंत्री कौन संभालेगा कुर्सी ?
बताते चलें कि नीतीश कुमार ने ऐसे समय में बिहार की कमान संभाली थी, जब राज्य पर अव्यवस्था व अपराध का आरोप लग रहा था। उन्होंने कानून-व्यवस्था को सुधारने, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास पर उल्लेखनीय कार्य किया ।
गयाजी जिला के टिकारी अनुमंडल अंतर्गत केसपा निवासी ई. हिमांशु शेखर मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार “सुशासन” की अवधारणा को स्थापित कर उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का प्रयास किया। ग्रामीण सड़कों का निर्माण, शिक्षा में सुधार, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएँ और पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण जैसी पहल उनके शासन की पहचान बनीं।पिछले लगभग बीस वर्षों में वे बिहार की राजनीति का पर्याय बन गए। उनकी राजनीतिक शैली में गठबंधन की राजनीति और व्यावहारिकता का विशेष महत्व रहा। समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन कर उन्होंने अपनी राजनीतिक भूमिका को बनाए रखा और सत्ता के केंद्र में बने रहे।विगत कुछ वर्षों में उनके स्वास्थ्य में गिरावट की चर्चा भी होती रही है। कई बार उनके अप्रत्याशित व्यवहार ने सरकार तथा सहयोगी दलों को असहज स्थिति में भी डाला है। ऐसे में राज्यसभा के लिए उनका नामांकन बिहार की सक्रिय राजनीति से उनके धीरे-धीरे अलग होने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। सभी का ध्यान बिहार के अगले मुख्यमंत्री के चयन पर है। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच पहली बार राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री बनने की संभावना प्रबल है। यह बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा।नीतीश कुमार को बिहार के विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए याद किया जाएगा। अब आने वाले नेतृत्व के सामने यह बड़ी चुनौती होगी कि वह उनके द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों को आगे बढ़ाए और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरे।