बिहार में आगामी 3-4 महीने में आर्थिक संकट होगा, इसी बहाने शराबबंदी हटेगा, दूसरा कोई विकल्प सरकार के पास नहीं: प्रशांत किशोर
संजीव कुमार .
सहरसा ( बिहार ).सहरसा में आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीके ने सरकार पर साधा निशाना, बोले – जनता के पैसे से वोट खरीदने का नतीजा है कि आज लोगों को सैलरी, ठेकेदारों को पेमेंट नहीं मिल रहा .सहरसा जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर शनिवार को सहरसा जिले में पहुंचे। वे ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान वे हर जिले में संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं। इसी क्रम में वे आज सहरसा पहुंचे, जहां उन्होंने पूरब बाजार स्थित होटल परदेसी कार्डो में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव परिणाम के बाद जन सुराज के नेताओं ने पश्चिम चंपारण स्थित गांधी भितिहरवा आश्रम में एक दिन का उपवास रखा था। उस समय जन सुराज की ओर से यह घोषणा की गई थी कि बिहार में बनी नई सरकार को अपने वादों को पूरा करने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा। इसके बाद ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत जन सुराज के कार्यकर्ता घर-घर जाकर जनता के बीच अपनी बात रखेंगे। पीके ने कहा कि इस अभियान को अगले पांच वर्षों तक प्रभावी ढंग से चलाने के लिए वे हर जिले में जाकर संगठन को पुनर्गठित कर रहे हैं।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा कि जन सुराज ने चुनाव से पहले ही यह बात कही थी कि चुनाव के परिणाम कुछ भी हो लेकिन नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे, क्योंकि उनकी मानसिक और शारिरीक हालत ऐसी नहीं है कि वे सीएम पद पर बने रहे। विधानसभा चुनाव में जनता को बरगलाने के लिए बीजेपी ने मुखौटा के रूप में नीतीश कुमार को इस्तेमाल किया और आज आप देख रहे हैं कि 202 विधायकों का समर्थन है इसके बाद भी नीतीश कुमार को सीएम का पद छोड़ना पड़ रहा है, क्योंकि यह नीतीश कुमार की लोकप्रियता का परिणाम नहीं, खरीदा गया मैंडेट था। इस बहुमत को दिलाने में जिनकी भूमिका रही अब वो तय करेंगे कि बिहार का सीएम कौन होगा? वहीं,बिहार में नए सीएम को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार का जो भी सीएम होगा उसकी प्राथमिकता बिहार नहीं बल्कि गुजरात होगा।
पीके ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता के पैसे से वोट खरीदने का नतीजा है कि आज लोगों को सैलरी नहीं मिल पा रही है, ठेकेदारों को पेमेंट नहीं मिल पा रहा है। पंचायत की योजनाओं के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है। अब सरकार चर्चा कर रही है कि बिहार से शराबबंदी को किसी तरह हटा कर कुछ पैसे की व्यवस्था किया जाए। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के लोगों को समझने की जरुरत है अगर सरकार बिजली फ्री दे रही है, तो बिजली का रेट भी बढ़ा दिया है। पंचायतों में विकास का काम ठप है, यही व्यवस्था रही तो बिहार में आगामी 3-4 महीने में आर्थिक संकट होगा और इसी बहाने से शराबबंदी को हटाया जाएगा, दूसरा कोई विकल्प सरकार के पास नहीं है।
