बिहार का पुनर्जागरण केवल स्वप्न नहीं, बल्कि हमारी साझा जिम्मेदारी और सामूहिक साधना है
S.K.RAJIV.
बिहारी हृदय की धड़कन केवल अपनी भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहती, वह संपूर्ण विश्व के कल्याण हेतु निरंतर स्पंदित होती है। और, जब विषय अपनी मातृभूमि बिहार की समृद्धि, स्वाभिमान और सर्वांगीण विकास का आता है, तब प्रत्येक बिहारी अपने सामर्थ्य, संकल्प और पुरुषार्थ की अंतिम सीमा तक जाकर योगदान देने को तत्पर हो जाता है।इस अभियान की यात्रा किसी संस्था मात्र की यात्रा नहीं, बल्कि बिहार के आत्मबोध, आत्मसम्मान और पुनर्जागरण का एक सतत प्रयत्न है। आरंभिक दो पड़ावों ( 22 मार्च 2021 और 22 मार्च 2022 ) तक समाज के जागरूक नागरिकों से इस वैचारिक आंदोलन से जुड़ने का आग्रह किया गया। तीसरे पड़ाव ( 22 मार्च 2023 ) तक गार्गी पाठशाला, निःशुल्क शिक्षा, निःशुल्क चिकित्सा शिविर एवं रक्तदान जैसे लोककल्याणकारी और मानवीय कार्य सुदृढ़ रूप से स्थापित हुए। चौथे पड़ाव ( 22 मार्च 2024 ) तक में बिहार में उद्यमशीलता की सशक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार पर गंभीर मंथन हुआ। और, अब हम सभी पाँचवें गौरवपूर्ण पड़ाव—22 मार्च 2026—की ओर दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ अग्रसर हैं।
इस संपूर्ण यात्रा के मूल में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी विकास वैभव का वह अद्वितीय, अविराम और निःस्वार्थ परिश्रम निहित है, जिसने असंख्य युवाओं, बौद्धिक वर्ग और प्रवासी बिहारियों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ा है। उनका चिंतन, मार्गदर्शन और सतत प्रेरणा बिहार के नव निर्माण की चेतना को दिशा देने वाला प्रकाशस्तंभ बन चुका है।आज, इस पावन अभियान के क्रम में, मैं आपसे विनम्र किंतु दृढ़ आग्रह करता हूँ कि आगामी कार्यक्रमों हेतु आप अपनी भावना, संकल्प अथवा शुभेच्छा स्वरूप एक संक्षिप्त संदेश अवश्य प्रदान करें। आपका यह छोटा-सा शब्द केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि आपकी सक्रिय सहभागिता, वैचारिक प्रतिबद्धता और सकारात्मक दिशा में आपके उत्तरदायित्व-बोध का सशक्त प्रमाण होगा।आइए, हम सब मिलकर संकल्प, संवेदना और कर्म के माध्यम से यह सिद्ध करें कि बिहार का पुनर्जागरण केवल स्वप्न नहीं, बल्कि हमारी साझा जिम्मेदारी और सामूहिक साधना है।