जीबीएम कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक दिवसीय व्याख्यान एवं परिचर्चा का हुआ आयोजन

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-जीबीएम कॉलेज की एनएसएस इकाई, एनसीसी इकाई एवं दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ कार्यक्रम।
-महिलाओं को अपने भीतर निहित ऊर्जा व क्षमताओं को पहचानने की है आवश्यकता.
विश्वनाथ आनंद
गया जी (बिहार)-गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह के तहत जीबीएम कॉलेज की एनएसएस इकाई, एनसीसी इकाई एवं दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में “महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में युवतियों की भूमिका” विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान एवं परिचर्चा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्रधानाचार्या डॉ शगुफ्ता अंसारी ने तथा संचालन एवं समन्वयन एनएसएस प्रोग्राम अॉफिसर डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी प्रधानाचार्या डॉ शगुफ्ता अंसारी, मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ सच्चिदानन्द प्रेमी, दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ जीतेन्द्र कुमार सिन्हा, उपाध्यक्ष डॉ रिचा दुबे, निदेशक डॉ राकेश दत्त मिश्र, एनएसएस प्रोग्राम अॉफिसर डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी एवं एनसीसी सीटीओ डॉ नगमा शादाब एवं अन्य मंचासीन अतिथियों ने संयुक्त रूप से पावन शांति पाठ के साथ दीप प्रज्ज्वलित करके किया। सभी अतिथियों का अभिनंदन पुष्पगुच्छ तथा शॉल प्रदान करके किया गया।

डॉ रश्मि ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। अपनी स्वरचित कविता ‘हर नारी में है नवदुर्गा’ द्वारा नारी के विविध कल्याणकारी स्वरूपों का सुमधुर शब्द चित्रण प्रस्तुत किया। “नारी तू ही दुर्गा, लक्ष्मी, तू ही जग-कल्याणी है। तू ही पार्वती, तू सीता, काली है, ब्रह्माणी है। संगीत, कला, साहित्य सभी विद्याओं को धारण करती। तू शिशु की प्रथम पाठशाला, नारी तू ही है सरस्वती” तथा “जगत-जननी, समूचे विश्व का आधार होती माँ। तपस्या, प्रेम, ममता, स्नेह का आगार होती माँ” जैसी भावपूर्ण पंक्तियों द्वारा महिलाओं को परिवार और समाज की रीढ़ एवं मूल स्तंभ बतलाया। कहा कि युवतियों एवं महिलाओं को अपने भीतर निहित ऊर्जा व क्षमताओं को पहचानने की आवश्यकता है। महिलाओं को एक दूसरे की प्रतिद्वंद्वी एवं प्रतियोगी बनने से कहीं अधिक सखी एवं सहयोगी बनने की आवश्यकता है। अपने मन को नकारात्मक भावों एवं विचारों से मुक्त करके परिवार, समाज तथा देश के हितार्थ मिलजुलकर कार्य करने की जरूरत है।

तत्पश्चात् डॉ राकेश दत्त मिश्र ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। डॉ सच्चिदानंद प्रेमी ने परिवार एवं समाज के निर्माण, विकास, एवं सुचारू संचालन में युवतियों एवं महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार रखे। कहा कि जहाँ महिलाओं को सम्मान दिया जाता है, वहीं प्रसन्नता, समृद्धि और सफलता की उपस्थिति होती है। कार्यक्रम को प्रो अफशां सुरैया, डॉ रिचा दुबे, डॉ नगमा शादाब, डॉ जीतेंद्र कुमार सिन्हा, प्रीति शेखर, डॉ फरहीन वज़ीरी, डॉ वीणा कुमारी जायसवाल ने भी संबोधित किया। डॉ रिचा ने महिलाओं को अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की बात कही। डॉ नगमा, डॉ वीणा कुमारी जायसवाल एवं प्रीति शेखर ने महिलाओं के स्वाभिमान एवं स्वाबलंबन के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं सशक्तीकरण के महत्व पर बिंदुवार अपने विचार रखे। वक्ताओं ने महिलाओं को सुरक्षित भविष्य के लिए बचत करने की सलाह दी। अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रभारी प्रधानाचार्या डॉ शगुफ्ता अंसारी ने सभी को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के उत्थान में शिक्षा और ज्ञान का महत्वपूर्ण योगदान है। महिलाओं की शिक्षा एवं सशक्तीकरण से संपूर्ण समाज लाभान्वित होता है। व्याख्यान सत्र के उपरांत छात्रा मानसी कुमारी, नैना कुमारी, अन्या, शुभांगी, आँचल, अनीषा आदि ने बढ़चढ़कर परिचर्चा सत्र में भाग लिया। कैडेट मानसी द्वारा महिलाओं की समस्याओं और विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ निभाई जाने वाली भूमिका पर प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया गया।

परिचर्चा में सक्रिय एवं तर्कपूर्ण प्रतिभागिता के लिए एनएसएस वॉलेंटियर अनीषा, अन्या, दीपशिखा मिश्रा, गीतांजलि, शिवानी, शुभांगी, नैना, श्रेया, अंजली, कोमल, प्रियांशु, खुशी परवीन, मुस्कान, सृष्टि तथा एनसीसीसी कैडेट काव्या शर्मा, शुभांगी, मानसी, आँचल, ब्यूटी, चाँदनी, श्वेता, स्वेच्छा, साक्षी, रानी को प्रमाण पत्र तथा मेडेल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ रश्मि प्रियदर्शनी एवं एनसीसीसी सीटीओ डॉ नगमा शादाब ने संयुक्त रूप से किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ फरहीन वज़ीर…