औरंगाबाद में जीवदया व गौरक्षा को समर्पित कार्यकर्ताओं का किया गया भव्य सम्मान समारोह के तहत स्वागत

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श्वेतांबर जैन संत हर्ष तिलक महाराज जी के आगमन पर उमड़ा श्रद्धा और सेवा का संगम.
विश्वनाथ आनंद
औरंगाबाद( बिहार )-भागवत प्रसाद बी.एड. कॉलेज, औरंगाबाद परिसर में शुक्रवार को जीवदया, अहिंसा एवं गौरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं के सम्मान हेतु एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। अवसर था श्वेतांबर जैन समाज के प्रतिष्ठित संत हर्ष तिलक महाराज जी के औरंगाबाद आगमन का। इसी दौरान संत श्री के आगमन को लेकर बिहार एवं झारखंड से आए सैकड़ों उत्साहित जीवदया प्रेमी कार्यकर्ताओं ने औरंगाबाद के देव मोड़ पर भव्य तरीके से स्वागत किया। इसके पश्चात जीवदया एवं गौरक्षा के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं का एक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें औरंगाबाद एवं आसपास के जिलों के अनेक चर्चित पशुप्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता उपस्थित रहे। ऐसे तो प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थितिसम्मेलन में विशेष रूप सेमुखिया संघ के सुजीत सिंह,
पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं विश्व हिंदू परिषद, गौरक्षा विभाग के अखिल भारतीय विधि प्रमुख शशांकधर शेखर,भारतीय सेवा दल के विभांशु मिश्र,औरंगाबाद सेवा शिविर के विकास जी एवं प्रकाश जीकी उपस्थिति रही। इस दौरान

युवा गौरक्षकों सहित कई कार्यकर्ता को सम्मानित किया गया.कार्यक्रम में युवा गौरक्षक विकास उर्फ बारूद सहित कई जीवदया कार्यकर्ताओं को उनके निरंतर सेवा कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। नन्द प्रभा परिवार की ओर से सभी सम्मानितजनों को प्रशस्ति पत्र एवं शॉल भेंट कर सम्मान प्रदान किया गया।
जैन साधुओं के विहार से क्षेत्र में अहिंसा का संदेश
विदित हो कि इन दिनों जैन साधुओं का एक जत्था इस क्षेत्र में विहार कर रहा है। इस अवसर पर यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि अहिंसा, जीवदया और त्याग ही धर्म की सर्वोच्च शिक्षा है, जिसे समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है।
वृषभनाथ फाउंडेशन की सराहना कार्यक्रम के आयोजक वृषभनाथ फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट, जो खनवाती में गौशाला का संचालन भी करता है, के सभी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता समारोह में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विशेष रूप से
नेहा कुमारी,अवकाश प्राप्त राजस्व अधिकारी महेंद्र प्रसाद,कुंदन पाठक,
देवगण-छतरपुर स्थित पौराणिक मंदिर के महंत साकेत बिहारी जी,औरंगाबाद के सुप्रसिद्ध जीवदया प्रेमी संतोष जी भी मौजूद रहे।
संयुक्त परिवार पर संत हर्ष तिलक महाराज का संदेश
अपने संबोधन में संत हर्ष तिलक महाराज जी ने संयुक्त परिवार प्रणाली की महत्ता पर विशेष बल देते हुए कहा कि आज समाज में टूटते परिवार गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने जीवदया, करुणा और पारिवारिक मूल्यों को सामाजिक स्थिरता की आधारशिला बताया। साथ ही उन्होंने औरंगाबाद के कार्यकर्ताओं एवं वृषभनाथ फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे गौरक्षा एवं जीवदया के कार्यों की खुले मंच से सराहना की।
जीवदया मामलों में संघर्षरत अधिवक्ताओं की भी सहभागिता
कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि औरंगाबाद एवं गया में जीवदया एवं पशु-अधिकार से जुड़े मुकदमों की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं का संघ भी इसमें शामिल हुआ।
इसमें प्रमुख रूप से
दीपक पाठक, अविनाश, उत्तम पाठक, सुशील दत्ता सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने जीवदया को विधिक संरक्षण दिलाने के लिए अपने अनुभव साझा किए।
अन्य विशिष्ट उपस्थिति
कार्यक्रम में दीनदयाल उपाध्याय विचार मंच से सम्मानित जितेंद्र सिंह जी, राममंदिर आंदोलन से जुड़े पोईवाँ निवासी गुरुजी भी उपस्थित रहे।
सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ कार्यक्रम संपन्न
समारोह का समापन जीवदया, अहिंसा, गौरक्षा एवं सामाजिक एकता के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित जनों ने संकल्प लिया कि वे पशु-कल्याण एवं मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करेंगे l